पुलिसवाला न्यूज़ के ब्यूरो चीफ मयंक श्रीवास्तव ने उठाया नो एंट्री के दौरान भारी मशीन की आवाजाही का मुद्दा, रोजाना भारी वाहनों की एंट्री पर भी सवाल।

नो एंट्री जोन में बोरिंग मशीन वाली गाड़ी की आवाजाही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले की जानकारी लेने और समाचार बनाने के लिए पुलिसवाला न्यूज़ के ब्यूरो चीफ मयंक श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की।

बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति की ओर से बताया गया कि उनका भतीजा डीएसपी है। साथ ही, यह भी कहा गया कि गाड़ी पहले से ही अंदर आ चुकी थी।

 

हालांकि, पुलिसवाला न्यूज़ के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, गाड़ी ने नो एंट्री लागू रहने के दौरान प्रवेश किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि गाड़ी पहले से अंदर मौजूद थी, तो नो एंट्री के दौरान बोरिंग मशीन वाली गाड़ी को दोबारा अंदर की गली में किस अनुमति से ले जाया गया।

पुलिसवाला न्यूज़ विगत कई दिनों से समाचारों के माध्यम से अपने पाठकों और यातायात पुलिस को लगातार सूचित कर रहा है कि इस क्षेत्र में रोजाना भारी मालवाहक वाहनों की एंट्री हो रही है। अब यह स्थिति रोजमर्रा की बात बनती जा रही है, जिससे नो एंट्री के नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

 

इससे पहले भी पुलिसवाला न्यूज़ ने एक भवन निर्माण सामग्री विक्रेता दुकानदार के कथित बयान का उल्लेख किया था। नाम न बताने की शर्त पर दुकानदार ने कहा था, “₹10,000 महीना देता हूं, तो गाड़ी क्यों नहीं लाऊंगा।” अब लगातार भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए इस कथित बयान को लेकर भी संदेह पैदा हो रहा है। हालांकि, इस कथन की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

 

इस मामले में एक और सवाल उठता है कि क्या किसी व्यक्ति का भतीजा डीएसपी होने से उसे यातायात नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति मिल जाती है? नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर प्रतिबंधित समय में भारी वाहन की आवाजाही किस आधार पर हुई, इसकी जांच होनी चाहिए।

 

पुलिसवाला न्यूज़ की ओर से इस मामले में यातायात पुलिस से शिकायत की जा रही है। शिकायत के माध्यम से मांग की जाएगी कि नो एंट्री के दौरान भारी मशीन वाली गाड़ी की आवाजाही की जांच कर संबंधित अनुमति और नियमों की स्थिति स्पष्ट की जाए।

हालांकि, इस बातचीत के संबंध में किसी डीएसपी का फोन नहीं आया है। यह भी संभव है कि संबंधित व्यक्ति ने बातचीत के दौरान डीएसपी भतीजा होने की बात कहकर हमें गुमराह किया हो। इसकी भी पुष्टि होना बाकी है। इसलिए मामले में तथ्यों की जांच और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण जरूरी है।

 

रिपोर्टर: मयंक श्रीवास्तव।

 

ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़।

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