डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
समझौते से जुड़े टूटते रिश्ते, वर्षों पुराने विवादों का भी हुआ अंत; लंबित 373 और प्री-लिटिगेशन के 300 मामलों का समाधान
डिंडौरी। आपसी सहमति और सुलह-समझौते के जरिए वर्षों से चले आ रहे न्यायालयीन विवादों के समाधान के लिए शनिवार को जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 673 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन मामलों में 1 करोड़ 46 लाख 92 हजार 450 रुपये के अवार्ड एवं राशि का निपटारा हुआ। लोक अदालत की खास बात यह रही कि यहां केवल मुकदमों का ही अंत नहीं हुआ, बल्कि समझाइश के बाद वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी और आपसी विवाद में उलझे परिवारों के बीच भी सुलह का रास्ता निकला।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष शशिकांता वैश्य के मार्गदर्शन में 12 सितंबर को जिला न्यायालय डिंडौरी, कुटुम्ब न्यायालय डिंडौरी और सिविल न्यायालय शहपुरा में नेशनल लोक अदालत आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय एम.एल. राठौर एवं प्रथम जिला न्यायाधीश डी.एस. मंडलोई ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान बताया गया कि लोक अदालत आपसी सहमति से विवादों के त्वरित और सरल समाधान का प्रभावी माध्यम है।
373 लंबित मामलों में 1.24 करोड़ के अवार्ड
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं न्यायाधीश मुग्धा कुमार के अनुसार लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित 373 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें 1 करोड़ 24 लाख 24 हजार 595 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
वहीं प्री-लिटिगेशन श्रेणी के 300 मामलों का समाधान करते हुए 22 लाख 67 हजार 855 रुपये की राशि संबंधित विभागों को प्राप्त हुई। इस तरह जिलेभर में कुल 673 मामलों का निराकरण करते हुए 1 करोड़ 46 लाख 92 हजार 450 रुपये के अवार्ड एवं राशि का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में पारिवारिक विवाद, मोटरयान दुर्घटना दावा, चेक अनादरण तथा राजीनामा योग्य आपराधिक एवं दीवानी प्रकरणों का आपसी समझौते से समाधान किया गया। इसके अलावा बैंक ऋण वसूली, बिजली और दूरभाष बिल बकाया तथा नगरपालिका के संपत्ति एवं जलकर से संबंधित प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निराकरण हुआ।
12 साल की शादी टूटने से बची, बच्चों के साथ घर लौटा परिवार
लोक अदालत में कई भावनात्मक पारिवारिक विवाद भी समझाइश से समाप्त हुए। कुटुम्ब न्यायालय में एम.एल. राठौर की समझाइश के बाद एक पति अपनी 12 वर्षों से विवाहित पत्नी और दो बच्चों के साथ वापस घर लौटने पर सहमत हुआ, जिससे परिवार फिर एकजुट हो सका।
इसी तरह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कमला उईके की समझाइश से वर्ष 2015 से अलग रह रहे पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद का समाधान कराया गया। वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई आपसी सहमति के साथ समाप्त हुई।
भाई-भाई और भाई-बहन के विवाद भी सुलझे
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डिंडौरी अतुल श्रीवास्तव तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शहपुरा कर्नल सिंह श्याम के न्यायालय में भी आपसी राजीनामे से पारिवारिक विवादों का समाधान हुआ। यहां भाई-भाई तथा भाई-बहन के बीच चल रहे विवादों का समझौते से निराकरण कर संबंधित प्रकरण समाप्त किए गए।
इस तरह नेशनल लोक अदालत ने न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने के साथ पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत दिलाई और कई रिश्तों के बीच आई दूरियों को खत्म करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजन में द्वितीय जिला न्यायाधीश शिवकुमार कौशल, तृतीय जिला न्यायाधीश रविंद्र गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनौडिया, न्यायिक मजिस्ट्रेट आर.पी. सिंह, रिया डेहरिया, अदिति सनौडिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपिका तारन, एडीएम जे.पी. यादव, एसडीओपी सतीश द्विवेदी, एएसपी रेखा सिंह सहित अधिवक्ता संघ, कर्मचारी संघ, डिफेंस काउंसिल टीम, अधिवक्ता, न्यायालयीन कर्मचारी, पक्षकार तथा विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

