डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
तत्कालीन प्रभारी CMHO को नोटिस, सहायक ग्रेड-03 निलंबित; Supervisor पर भी कार्रवाई की तैयारी
डिंडौरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2017 से 2024 के बीच ₹60 लाख 65 हजार 590 रुपये के अनियमित एवं अधिक भुगतान का मामला सामने आया है। CMHO कार्यालय डिंडौरी में हुई इस वित्तीय अनियमितता की जांच के बाद जांच दल ने तीन अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना है। मामले में तत्कालीन प्रभारी CMHO डॉ. रमेश मरावी को कारण बताओ नोटिस, जबकि सहायक ग्रेड-03 गुलाब प्रसाद साहू को निलंबित कर दिया गया है। वहीं Supervisor प्रकाश सिंह परस्ते के निलंबन की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव सक्षम अधिकारी को भेजा गया है।
कार्यालय आयुक्त, कोष एवं लेखा, मध्यप्रदेश, भोपाल द्वारा 24 नवंबर 2025 को संदिग्ध भुगतानों की सूची भेजे जाने के बाद कलेक्टर डिंडौरी के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया था। जांच के दौरान IFMIS प्रणाली के माध्यम से किए गए भुगतानों की पड़ताल की गई। जांच प्रतिवेदन में ₹60,65,590 के अनियमित भुगतान की पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है।
Approver की भूमिका में थे तत्कालीन प्रभारी CMHO
जांच में तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेश मरावी की भूमिका भी सामने आई है। वे 22 मार्च 2021 से 14 अगस्त 2025 तक प्रभारी CMHO के पद पर रहते हुए IFMIS में Approver की भूमिका में थे।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, विभिन्न देयकों और एरियर भुगतानों को बिना उचित परीक्षण, पात्रता की जांच तथा पूर्व भुगतान के मिलान के अनुमोदित किया गया। जांच दल ने इसे मध्यप्रदेश कोषालय संहिता 2020 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया। इसी आधार पर डॉ. मरावी को वित्तीय अनियमितता के लिए उत्तरदायी मानते हुए कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।
लेखा प्रभारी और IFMIS Verifier गुलाब प्रसाद साहू निलंबित
मामले में कार्रवाई की दूसरी बड़ी कड़ी सहायक ग्रेड-03 गुलाब प्रसाद साहू से जुड़ी है। वे 31 अक्टूबर 2015 से CMHO कार्यालय में लेखा प्रभारी तथा 1 अप्रैल 2017 से IFMIS में Verifier के रूप में कार्यरत थे।
जांच के अनुसार, उन्होंने वेतन, एरियर और अन्य देयकों को Verifier के रूप में नियमों के अनुरूप परीक्षण किए बिना भुगतान के लिए Approver को अग्रेषित किया। लेखा प्रभारी के तौर पर उन्हें देयकों की पात्रता की जांच, सक्षम स्वीकृति, आवंटन तथा सही मद से भुगतान सुनिश्चित करना था।
जांच में इन प्रक्रियाओं की अनदेखी सामने आने के बाद कलेक्टर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत गुलाब प्रसाद साहू को निलंबित कर दिया।
Supervisor पर भी निलंबन की तलवार
जांच में तीसरे कर्मचारी प्रकाश सिंह परस्ते, Supervisor की भूमिका भी सामने आई है। वे वर्ष 2017 से CMHO कार्यालय में IFMIS के Creator के रूप में कार्य कर रहे थे।
जांच प्रतिवेदन के मुताबिक, उनके द्वारा इलेक्ट्रॉनिक देयकों को निर्धारित प्रारूप, आवश्यक विवरण और संबंधित अभिलेख संलग्न किए बिना Verifier को अग्रेषित किया गया। इसे कोषालय संहिता के प्रावधानों के विपरीत माना गया है।
मामले में उन्हें भी जिम्मेदार मानते हुए निलंबन की कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया है।
पूर्व CMHO अधिकारियों पर भी होगी नियमानुसार कार्रवाई
वित्तीय अनियमितता की अवधि में पदस्थ रहे अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। इनमें डॉ. बलदेव सिंह भलावी, डॉ. भरत सिंह टेकाम और डॉ. आर.के. मेहरा के नाम शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, डॉ. बलदेव सिंह भलावी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, डॉ. भरत सिंह टेकाम का निधन हो चुका है, जबकि डॉ. आर.के. मेहरा का अन्यत्र स्थानांतरण हो चुका है। इन अधिकारियों के संबंध में भी नियमानुसार पृथक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
जांच के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई की जद
₹60.65 लाख के इस मामले में जांच प्रतिवेदन सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। फिलहाल तत्कालीन प्रभारी CMHO को नोटिस, सहायक ग्रेड-03 के निलंबन और Supervisor के खिलाफ निलंबन प्रस्ताव की कार्रवाई सामने आई है। वहीं, संबंधित अवधि में पदस्थ रहे अन्य अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी है।
