जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: डॉक्टरों की लेट-लतीफी से गर्भ में शिशु की मौत, परिजनों ने कलेक्टर से की शिकायत
शहडोल-मध्य प्रदेश के शहडोल जिला अस्पताल से चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। डॉक्टरों की कथित लापरवाही और समय पर इलाज न मिलने के कारण एक गर्भवती महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से आक्रोशित परिजनों ने जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), और सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
प्लेटलेट काउंट का बहाना बनाकर टाला ऑपरेशन
जैतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम झींकबिजुरी निवासी आवेदक मो. इजहारुल मंसूरी ने बताया कि उन्होंने अपनी बहू कनीज फात्मा को डिलीवरी के लिए 18 मई 2026 को जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने कहा था कि 19 मई को ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया जाएगा। सुबह करीब 9 से 10 बजे के बीच महिला को ऑपरेशन थिएटर में भी ले जाया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने यह कहकर उन्हें बाहर कर दिया कि महिला का प्लेटलेट काउंट केवल 65,000 है, इसलिए अभी ऑपरेशन नहीं हो सकता।
प्राइवेट लैब की रिपोर्ट में सब सही, फिर भी नहीं आए डॉक्टर
परिजनों ने अस्पताल के बाहर से महिला का ब्लड सैंपल लेकर एक निजी पैथोलॉजी लैब से सीबीसी (CBC) जांच कराई। शाम करीब 6-7 बजे आई रिपोर्ट में प्लेटलेट काउंट 1,200,000 (सामान्य) आया, जिसे लेकर वे तुरंत अस्पताल की ड्यूटी नर्स (सिस्टर) के पास पहुंचे। नर्स ने सब ठीक बताते हुए कहा कि फिलहाल कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऑपरेशन अगली सुबह (20 मई) को होगा।
दर्द से तड़पती रही प्रसूता, डॉक्टरों को आने में लगे 4-5 घंटे
शिकायती पत्र के अनुसार, 19 मई की रात करीब 1:00 बजे प्रसूता कनीज फात्मा को पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात नर्स को इसकी जानकारी दी। नर्स ने मरीज की जांच करने के बाद तुरंत संबंधित डॉक्टरों को फोन पर सूचना दी। आरोप है कि फोन किए जाने के बावजूद डॉ. त्रिगेन्द्र सिंह और डॉ. अंजली टेकाम को अस्पताल पहुंचने में करीब 4 से 5 घंटे का लंबा समय लग गया।
गर्भ में ही तोड़ दिया दम, न्याय की गुहार
देर रात लापरवाही बरतने के बाद, अगली सुबह (20 मई) करीब 5 से 6 बजे के बीच महिला का ऑपरेशन किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों की इस लेट-लतीफी के कारण शिशु ने पेट के अंदर ही दम तोड़ दिया था।
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को सौंपे गए पत्र में डॉ. त्रिगेन्द्र सिंह एवं डॉ. अंजली टेकाम के ऊपर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सकें
अजय पाल







