डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
गुतलवाह शिविर में कलेक्टर के समक्ष रखे गए थे मामले, शिकायत पर कार्रवाई का इंतजार
शहपुरा। आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण कर प्रशासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित जन विश्वास शिविरों की प्रभावशीलता अब सवालों के घेरे में है। शाहपुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत गुतलवाह में 9 सितंबर 2026 को आयोजित जन विश्वास शिविर में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के समक्ष विभिन्न समस्याओं और शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए थे। लेकिन शिविर में प्रस्तुत कुछ शिकायतों पर अब तक कार्रवाई और निराकरण की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से शिकायतकर्ताओं में असंतोष है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिविर में आवेदन देने के बाद भी शिकायतों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, तो आमजन को इन शिविरों का वास्तविक लाभ कितना मिल रहा है?
शासन द्वारा मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026 के क्रियान्वयन के संबंध में 31 जुलाई 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। अभियान का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। हालांकि, गुतलवाह में आयोजित शिविर में प्रस्तुत शिकायतों की वर्तमान स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल अभियान के जमीनी क्रियान्वयन की पड़ताल की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
शाहपुरा के वार्ड क्रमांक-1 निवासी मनीष साहू ने उत्कृष्ट विद्यालय शाहपुरा से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों की गुणवत्ता को लेकर जन विश्वास शिविर में शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, राज्य सूचना आयोग भोपाल के आदेश के बाद उपलब्ध कराई गई आरटीआई की प्रतियां अत्यधिक डार्क, धुंधली और अप्रमाणित थीं, जिसके कारण उनमें दर्ज जानकारियों को स्पष्ट रूप से पढ़ना मुश्किल हो रहा था।
इस संबंध में मनीष साहू ने जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य से स्पष्ट एवं पठनीय प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिविर में आवेदन देने के बावजूद अब तक उन्हें न तो अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं और न ही कार्रवाई के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी मिली है।
पोर्टल पर शिकायत दर्ज हुई या नहीं, इस पर भी असमंजस
शिकायतकर्ता ने जन विश्वास शिविर में प्रस्तुत आवेदन की ऑनलाइन पंजीयन स्थिति जानने का प्रयास किया तो उन्हें बताया गया कि शिकायत संबंधित विभाग को भेज दी गई है। वहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित विभाग से जानकारी लेने पर उन्हें जन विश्वास पोर्टल पर इस प्रकरण की प्रविष्टि उपलब्ध नहीं होने की बात बताई गई।
इस स्थिति ने शिकायतों के पंजीयन और उनकी निगरानी की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत पोर्टल पर दर्ज नहीं हुई है, तो उसकी प्रगति और निराकरण की स्थिति की निगरानी किस आधार पर की जा रही है? वहीं, यदि शिकायत दर्ज है, तो उसकी पंजीयन संख्या, संबंधित विभाग को भेजे जाने और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को क्यों नहीं मिल पाई? इन सवालों पर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
शासकीय कर्मचारी के कथित द्विविवाह की शिकायत भी लंबित होने का आरोप
जन विश्वास शिविर में एक शासकीय लोक सेवक एवं प्राचार्य के विरुद्ध कथित द्विविवाह और तीन संतान होने से संबंधित शिकायत भी प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले में भी अब तक किसी विभागीय जांच या कार्रवाई की स्थिति से उन्हें अवगत नहीं कराया गया है।
शासकीय सेवा आचरण नियमों के तहत जीवित पत्नी के रहते दूसरा विवाह करने के मामलों में नियमानुसार शासन की पूर्व अनुमति से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं। हालांकि, संबंधित शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता विभागीय जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है। ऐसे में शिकायत पर नियमानुसार जांच कर उसकी वस्तुस्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
शिविर में आवेदन के बाद कार्रवाई की जानकारी भी जरूरी
जन विश्वास शिविरों का उद्देश्य केवल आमजन से आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है। इसके लिए शिकायतों का पंजीयन, संबंधित विभाग को प्रेषण, समयबद्ध कार्रवाई और शिकायतकर्ता को निराकरण की जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। यदि शिकायतकर्ता को अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो शिविर के उद्देश्यों और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतकर्ता मनीष साहू ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से दोनों मामलों में शिकायतों की पंजीयन स्थिति स्पष्ट करने, अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने तथा लंबित शिकायतों की नियमानुसार जांच कर निराकरण सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब प्रशासन के जवाब का इंतजार
गुतलवाह में आयोजित जन विश्वास शिविर में प्रस्तुत शिकायतों को लेकर उठे सवालों के बीच अब जिला प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतें वास्तव में पोर्टल पर दर्ज हुई हैं या नहीं, संबंधित विभागों ने उन पर क्या कार्रवाई की है और अब तक निराकरण क्यों नहीं हुआ, इन बिंदुओं पर आधिकारिक स्थिति सामने आना आवश्यक है। फिलहाल, शिकायतकर्ता को दोनों मामलों में स्पष्ट जवाब मिलने का इंतजार है।
संबंधित अधिकारियों और प्राचार्य का पक्ष इस संबंध में प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







