कटनी/ढीमरखेड़ा
कटनी । विकास के नाम पर सरकारी खजाने को किस तरह चूना लगाया जाता है, इसकी एक बानगी ग्राम पंचायत उमरियापान में देखने को मिल रही है। पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान गांव के कायाकल्प और जनसुविधाओं के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये की स्वीकृतियां तो जारी हुईं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। गांव के जागरूक नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पिछले 18 महीनों में पास किए गए सभी फर्जी बिलों, वाउचरों और निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की जोरदार मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि उमरियापान पंचायत में भ्रष्टाचार का ऐसा ताना-बाना बुना गया है, जहाँ बिना काम कराए ही कागजों पर फर्जी फर्में बनाकर और फर्जी बिल लगाकर शासकीय धनराशि का धड़ल्ले से आहरण किया जा रहा है।
*फर्जी बिलों और कागजी विकास का पूरा गणित*
ग्राम पंचायत उमरियापान में चल रहे इस खेल की जब परतें उधेड़ी जाती हैं, तो कई चौकाने वाले मामले सामने आते हैं। पिछले 1.5 वर्षों के दौरान पंचायत में हुए वित्तीय लेन-देन की अगर सूक्ष्मता से जांच की जाए, तो करोड़ों रुपये की अनियमिताएं उजागर होना तय माना जा रहा है। गांव की विभिन्न गलियों में नाली निर्माण, साफ-सफाई, मलबे की सफाई और सीसी रोड मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान उठा लिया गया है। हकीकत यह है कि जिन नालियों की सफाई या निर्माण के नाम पर बिल लगे हैं, वे आज भी कीचड़ और गंदगी से लबालब हैं। सामग्री आपूर्ति के नाम पर जिन दुकानों या फर्मों के कोटेशन और जीएसटी (GST) बिल फाइल में लगाए गए हैं, उनमें से कई फर्में धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं। केवल कमीशनखोरी के चक्कर में बोगस बिल तैयार करवाकर पंचायत के खाते से राशि ट्रांसफर कराई गई है। गांव में पानी की समस्या के नाम पर नए हैंडपंप खनन, मोटर मरम्मत और टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति दर्शाकर फर्जी भुगतान कराया गया। साथ ही, गांव की गलियों को रोशन करने के नाम पर महंगी स्ट्रीट लाइटों की खरीद के ऐसे बिल लगाए गए, जिनका न तो कोई स्टॉक रजिस्टर में दर्ज है और न ही वे लाइटें गांव में लगी हैं।
मस्टर रोल में बड़ा फर्जीवाड़ा: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और अन्य योजनाओं के तहत मजदूरी के नाम पर ऐसे लोगों के नाम मस्टर रोल में दर्ज किए गए हैं, जो वर्षों पहले गांव छोड़ चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, काम मशीनों से कराया जा रहा है और बिल मजदूरों के नाम पर फाड़े जा रहे हैं।
*बयानों में छलका दर्द*
पंचायत में व्याप्त इस अनियमितता को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। गांव के चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक केवल पंचायत के फर्जीवाड़े और अधिकारियों की साठगांठ की चर्चाएं गर्म हैं।

पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट

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