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प्रशासनिक महकमे में हलचल, हाई कोर्ट की डबल बेंच में तय होगी जवाबदेही

 

मैदान बचाओ समिती का हाईवे चक्काजाम का कार्यक्रम स्थगित

इंदौर। नीमच शहर के विशाल और ऐतिहासिक खेल मैदान के अस्तित्व को बचाने की मुहिम अब न्याय के सर्वोच्च मंदिर तक पहुंच चुकी है। मैदान के मूल एवं सुरक्षात्मक स्वरूप के संरक्षण की मांग को लेकर शहर के सजग नागरिकों और ‘मैदान बचाओ समिति’ द्वारा छेड़े गए जन-आंदोलन ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) को विचारार्थ स्वीकार करते हुए प्रारंभिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद से ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि अब तक स्थानीय स्तर पर फैसले को आगे बढ़ाने में जुटे अफसरों को सीधे उच्च न्यायालय में अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करना होगा।

 

समिती का पक्ष

गौरतलब है की नीमच में बीती 27 जुलाई से नीमच के बीच बहुउपयोगी विशाल मैदान बचाने और सांदीपनि विध्यालय किसी और उपयुक्त स्थान पर बनाने को लेकर शहर के नागरिकों और खेल प्रेमियों द्वारा लगातार चरण बद्ध आंदोलन जारी है। मैदान बचाओ समिती का कहना है कि लगभग 2021 में नीमच में सांदीपनि विध्यालय स्वीकृत हुआ था। जिसके निर्माण हेतु हवाई अड्डे के समीप भूमी पूजन 2024 में किया गया था। बगैर किसी आधार के वहाँ निर्माण रद्द कर दिया गया। दूसरी जगह पोस्ट ऑफिस के सामने कन्या विध्यालय के रूप में तय की गई। नक्शा बनवाया गया और उस जगह को भी 4 महीने की कुश्ती के बाद बगैर किसी औचित्य के केंसील कर दिया गया। समिती का कहना है की शहर की विभिन्न अन्य जगहों पर प्रशासन ने विचार किया और भूमाफिया उन जमीनो पर स्टे ले आए। लगभग एक वर्ष से प्रशासन और नगर पालिका उन स्टे पर वाजिब जवाब देने पर अक्षम रहे। समिती ने कहा कि ऐसे में विध्यालय निर्माण हेतु यह मैदान कभी भी प्रशासन की पहली और उपयुक्त पसंद नहीं था। लेकिन हर उपयुक्त जगह पर घुटने टेक कर आखिर में प्रशासन ने इस मैदान की बली चढ़ाने का मन बना लिया। शुरुआत में प्रशासन कहता रहा की मैदान भी बचेगा और विध्यालय भी बनेगा। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने खुद समिती से बातचीत के बाद मीडिया में बयान जारी किया था कि सांदीपनि विध्यालय के तहत निर्मित सभी स्पोर्ट्स फेसेलिटी पर आम नागरीकों का भी अधिकार होगा। उन्होंने इस हेतु लिखित ऑर्डर जारी करने की बात कही थी उसके बावजूद ऐसा कोई ऑर्डर जारी नहीं किया गया। इन सब आधार पर समिती ने हाईकोर्ट से याचना की कि मजबूरी वश शहर के सबसे विशाल कॉमन स्पेस की बली नहीं चढ़ाई जानी चाहिए।

हाई कोर्ट की सीधी निगरानी: डबल बैच करेगी सुनवाई

स्थानीय स्तर पर जन-आवाज और नागरिकों की आपत्तियों की अब राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक ढांचे के दायरे में विधिक समीक्षा होगी। 5 सितंबर को दायर की गई याचिका पर 17 सितंबर गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले की संवेदनशीलता और जनहित की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर एवं माननीय न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ (Double Bench) इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। बताया जा रहा है कि याचिका में सीधे मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को मुख्य पक्षकार बनाया गया है। इसके चलते अब राज्य शासन स्तर पर इस पूरे विषय की जवाबदेही तय होने की संभावना है। मामला WRIT PETITION (PIL) के रूप में दर्ज हो चुका है, जिससे मैदान के संरक्षण को लेकर पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में आ गई है।

‘मैदान बचाओ समिति’ की मजबूत विधिक तैयारी

खेल मैदान के सार्वजनिक स्वरूप और बच्चों व खिलाड़ियों के खेलने के अधिकार को सुरक्षित करने के उद्देश्य से नीमच के जागरूक नागरिकों ने यह विधिक मोर्चा खोला है। अदालत में जनता और खिलाड़ियों का पक्ष मजबूती से रखने के लिए उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत, एडवोकेट अरुणा तुगनावत, एडवोकेट मोहित कांबले एवं एडवोकेट युवराज त्रिवेदी की अनुभवी लीगल टीम कमान संभाले हुए है। प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर मैदान के स्वरूप से जुड़े तथ्यों को कोर्ट के समक्ष प्रमुखता से रखा जा रहा है।

अगली सुनवाई पर टिकीं शहर की निगाहें

मामला वर्तमान में ‘मोशन हीरिंग’ के चरण में है। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यदि अदालत प्रथम दृष्टया संतुष्ट होती है, तो खेल मैदान के संरक्षण हेतु शासन को आवश्यक दिशा-निर्देश या अंतरिम आदेश जारी होने की संभावना है।

मैदान बचाओ समिती की प्रतिक्रिया

मैदान बचाओ समिती ने इस खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बयान जारी कर कहा है की इस बीच कोर्ट में सुनवाई तक अगले सभी उग्र प्रदर्शन और हाईवे चक्काजाम के कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया है लेकिन नीमच के भारत माता (फॉर जीरो) चौराहे पर जारी धरना प्रदर्शन रोजाना जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि संभावित अदालती प्रक्रिया को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा का दौर शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर, पूरे नीमच शहर के खेल प्रेमियों, युवाओं और आम नागरिकों की निगाहें अब हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जन-आंदोलन के इस संघर्ष को विधिक संबल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

जिला// ब्यूरो ललित सिंह चुंडावत नीमच

9425108115✍️

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