डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

डिंडौरी, 5 जून। जनजातीय कला और कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में डिंडौरी जिले ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पाटनगढ़ की विश्व प्रसिद्ध गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और राज्य मंत्री राधा सिंह ने वर्चुअल माध्यम से ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आजीविका ग्राम संगठन पाटनगढ़ और डॉट्स एंड डैशेज संस्था के बीच गोंडी चित्रकला के संरक्षण, कलाकारों की आजीविका संवर्धन और विपणन सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह तथा अमेजन कारीगर टीम के प्रतिनिधि वर्चुअल रूप से शामिल हुए। वहीं शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह तेकाम, भाजपा जिलाध्यक्ष चमरू सिंह नेताम सहित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा गोंडी चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई गई। कलाकारों ने कैनवास, टी-शर्ट, साड़ी, दुपट्टा, रूमाल सहित विभिन्न उत्पादों पर उकेरी गई लगभग 30 कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में जनजातीय संस्कृति, लोकजीवन और प्रकृति के विविध रंग देखने को मिले।

अपने संबोधन में प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को साकार करने में स्थानीय कला की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं राधा सिंह ने कहा कि डिजिटल विपणन से कलाकारों और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि पाटनगढ़ की गोंडी चित्रकला देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है। ई-कॉमर्स मंच के माध्यम से कलाकारों को व्यापक बाजार मिलेगा, जिससे उन्हें उनकी कलाकृतियों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और युवा पीढ़ी भी अपनी परंपरागत कला से जुड़ सकेगी।

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि करंजिया विकासखंड का पाटनगढ़ गांव देश-दुनिया में गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित है, जहां 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि गोंडी चित्रकला गोंड समुदाय की संस्कृति, लोककथाओं और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की जीवंत अभिव्यक्ति है।

कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि डॉट्स एंड डैशेज संस्था के सहयोग से कलाकार परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां औसत आय 35 से 40 हजार रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 60 हजार से 2.70 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

नई व्यवस्था के तहत गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों को अमेजन कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे पाटनगढ़ की कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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