डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

चंद्र विजय महाविद्यालय में जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण, पारंपरिक कला को आजीविका से जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

डिंडौरी। जिले की समृद्ध जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के साथ युवाओं के हुनर को रोजगार से जोड़ने की दिशा में शासकीय चंद्र विजय महाविद्यालय डिंडौरी में जनजातीय कला-कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में विद्यार्थी गोंडी चित्रकला एवं पारंपरिक जनजातीय कला की बारीकियां सीखने के साथ उसे रोजमर्रा में उपयोग होने वाले उत्पादों पर उतार रहे हैं।

कार्यक्रम की खास बात यह है कि विद्यार्थियों ने गोंडी चित्रकला को केवल कागज और पारंपरिक चित्रों तक सीमित न रखते हुए साड़ी, टी-शर्ट, पर्स और बैग पर आकर्षक कलाकृतियां उकेरी हैं। इससे जहां विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा सामने आ रही है, वहीं जनजातीय कला को उपयोगी उत्पादों के रूप में विकसित कर बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

कला के साथ रोजगार की संभावनाओं पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनजातीय कला एवं हस्तशिल्प को कौशल विकास और आजीविका से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गोंडी कला से तैयार साड़ी, टी-शर्ट, पर्स और बैग जैसे उत्पादों के जरिए विद्यार्थी अपने हुनर को स्वरोजगार का माध्यम भी बना सकते हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को कला की बारीकियां सिखाने के साथ उनमें उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की सोच विकसित करना है।

आयोजन के माध्यम से डिंडौरी की पारंपरिक जनजातीय कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे आधुनिक उपयोग के अनुरूप नया स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे एक ओर स्थानीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित युवाओं के लिए भविष्य में आय के नए साधन विकसित होने की संभावना भी बन सकती है।

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