खेल-खेल में कचरा प्रबंधन सीख रहे बच्चे, इको क्लब की अनूठी पहल से जग रही पर्यावरण संरक्षण की अलख
सेजेस राजिम में रंगीन डस्टबिन से सिखाया जा रहा कचरे का वर्गीकरण, ई-वेस्ट संग्रहण में भी जुटे विद्यार्थी
गरियाबंद/राजिम। स्वच्छता की सीख जब खेल-खेल में मिले, तो वह आदत बनकर जीवन का हिस्सा बन जाती है। इसी उद्देश्य से शासकीय रामबिशाल पांडेय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (सेजेस राजिम) में इको क्लब द्वारा विद्यार्थियों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की अनूठी पहल की जा रही है।
रंगीन डस्टबिन और रोचक गतिविधियों के माध्यम से बच्चे सीख रहे कचरे का सही वर्गीकरण। विद्यार्थियों को गीले, सूखे, इलेक्ट्रॉनिक और सैनिटरी कचरे की पहचान कर उन्हें अलग-अलग रखने तथा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार निपटान करने का अभ्यास कराया जा रहा है। इससे बच्चों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित हो रही है।
विद्यालय की इको क्लब प्रभारी समीक्षा गायकवाड़ ने बताया कि स्वच्छता ही सेवा एवं स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से कचरा प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को इस पहल से जोड़कर छोटी उम्र से ही स्वच्छता की अच्छी आदतें विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
गतिविधियों के दौरान बच्चे फूल-पत्तियां और फलों के छिलकों जैसे गीले कचरे तथा प्लास्टिक रैपर, झिल्लियों और बोतलों जैसे सूखे कचरे को अलग-अलग पहचानना सीख रहे हैं। वहीं, पुराने चार्जर और इस्तेमाल किए गए सेल के उदाहरणों से ई-वेस्ट के सुरक्षित संग्रहण एवं निपटान की जानकारी भी दी जा रही है।
ई-वेस्ट संग्रहण में विद्यार्थियों के साथ पालक भी निभा रहे भागीदारी। विद्यार्थी घरों से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान लाकर एकत्रित कर रहे हैं। इसे अधिकृत संस्था के माध्यम से सुरक्षित निपटान एवं पुनर्चक्रण के लिए भेजने की योजना है। इको क्लब के विद्यार्थी छोटे बच्चों को भी मार्गदर्शन दे रहे हैं, जिससे उनमें नेतृत्व, सहयोग और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना मजबूत हो रही है।
विद्यालय की यह पहल संदेश देती है कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं, बल्कि संस्कार है। बच्चों में आज विकसित हो रही पर्यावरण संरक्षण की आदतें कल स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार समाज के निर्माण की मजबूत नींव बन सकती हैं।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद
