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​शहडोल। मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना और सनातन संस्कृति के विस्तार के लिए शहडोल की पावन धरा पर दो दिवसीय भव्य राष्ट्रीय किन्नर महासमागम का ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ।

देश भर से जुटे किन्नर

महामंडलेश्वरों, जगद्गुरुओं और संतों की मौजूदगी में यह समागम धार्मिक सौहार्द और समाज सेवा का बड़ा केंद्र बनकर उभरा।
​धार्मिक अनुष्ठान और पट्टाभिषेक
जगद्गुरु काजल ठाकुर मां (भोपाल) के पावन सानिध्य और स्थानीय आयोजक सोनाली व सिवानी पटेल की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को मुख्य अनुष्ठान हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संतों की गरिमामयी उपस्थिति में विधि-विधान से ‘पट्टाभिषेक’ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शुद्धिकरण के साथ 6 किन्नरों की सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई। शाम को गाजे-बाजे और पारंपरिक उल्लास के साथ शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

समाज सेवा ही हमारा असली धर्म:

संत समाज वैष्णव अखाड़ा मुंबई और किन्नर अखाड़ा (भोपाल-उज्जैन) की अगुवाई में आयोजित इस सम्मेलन में आए वरिष्ठ संतों ने प्रेस से चर्चा में कहा:
​”हमें राजनीति या धन-संपत्ति से कोई मोह नहीं है। दान में मिलने वाली राशि को हम समाज सेवा और धर्म-कार्यों में लगाते हैं। हमारा किसी धर्म से विरोध नहीं है।”
​संतों ने कोर्ट के निर्णयों का स्वागत करते हुए समाज को सचेत किया कि डरा-धमकाकर अवैध वसूली करने वाले लोग असली किन्नर नहीं हैं।

देशभर से जुटे प्रमुख चेहरे

इस महासमागम में भोपाल, इंदौर, मुंबई, जबलपुर, नागपुर और सागर समेत देश के कोने-कोने से प्रमुख किन्नर नायक और संत शामिल हुए। इनमें महामंडलेश्वर मुस्कान नायक, आनंदी आनंद गिरि माता, सपना नायक, मट्टू मां, सितारा गुरु और उत्तमा मां जैसे कई बड़े नाम शामिल रहे। शहडोल के इतिहास में यह आयोजन सनातन संस्कृति और किन्नर समाज के कल्याण के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

अजय पाल

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