डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

प्रभारी प्राचार्य की मनमानी उजागर

शहपुरा। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शासन द्वारा सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध कराई गई ICT लैब की सुविधा शहपुरा विकासखंड के हायर सेकेंडरी स्कूल झगरैहठा में विद्यार्थियों के लिए अब तक उपयोगी साबित नहीं हो सकी है। करीब 10 लाख रुपए की लागत से तैयार लैब में कंप्यूटर, स्मार्ट टीवी, प्रिंटर सहित अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के बावजूद इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हुआ है। इससे विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा और प्रायोगिक प्रशिक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

लाखों खर्च के बाद भी लैब का उपयोग नहीं

ICT लैब स्थापित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना और उन्हें बदलते तकनीकी दौर के अनुरूप तैयार करना है। शासन द्वारा इसके लिए विद्यालय में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद लैब का संचालन शुरू नहीं होने से लाखों रुपए खर्च कर उपलब्ध कराई गई सुविधा के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

संचालन में अड़चन क्या, प्रबंधन से जवाब जरूरी

लैब तैयार होने और उपकरण उपलब्ध होने के बाद भी कक्षाएं शुरू नहीं होने को लेकर अब विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि लैब संचालन के लिए कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर या अन्य कर्मचारी की आवश्यकता है, तो विद्यालय स्तर से संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर व्यवस्था कराने के लिए क्या पहल की गई? वहीं यदि उपकरणों में तकनीकी समस्या है तो उसे दूर कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

ग्रामीण विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से वंचित होने का खतरा

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में उपलब्ध ICT लैब डिजिटल शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है। कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान आज शिक्षा के साथ-साथ भविष्य के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में लैब का संचालन नहीं होने से विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर मिलने वाली डिजिटल शिक्षा का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

मामले को लेकर जिला कार्यालय द्वारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान ICT लैब के संचालन में आ रही वास्तविक समस्या, उपलब्ध संसाधनों की स्थिति और विद्यालय प्रबंधन की भूमिका की जानकारी ली जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या शासन के निर्देशों की अनदेखी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

अब सवाल यह है कि करीब 10 लाख रुपए की लागत से तैयार ICT लैब विद्यार्थियों के लिए कब शुरू होगी? शासन की डिजिटल शिक्षा संबंधी इस सुविधा का लाभ बच्चों को दिलाने के लिए जिम्मेदारी कब तय होगी और विद्यालय में नियमित कंप्यूटर प्रशिक्षण आखिर कब शुरू होगा।

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