
शहडोल /मध्य प्रदेश को लगातार 6 बार प्रतिष्ठित ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ दिलाने में धरातल पर पसीना बहाने वाले करीब 27 हजार ‘किसान मित्र’ और ‘किसान दीदी’ आज भी अपनी बहाली की राह देख रहे हैं। सोमवार को भारतीय किसान मित्र/दीदी मजदूर संघ (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सेवा बहाली की पुरजोर मांग की।
2007 से 2019 तक निभाई रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका
संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2007-08 में ‘आत्मा’ (कृषि तकनीकी प्रबंधन अधिकरण) योजना के तहत प्रदेश भर में किसान मित्रों का चयन किया गया था। 2007 से लेकर 2013 तक जब तक आत्मा योजना में नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई थी, तब तक कृषि विभाग और आत्मा परियोजना की प्रत्येक योजना व तकनीकी विस्तार का जिम्मा इन्हीं किसान मित्रों के कंधों पर था। बाद में कर्मचारियों की भर्ती के उपरांत भी इन्होंने दोगुनी ऊर्जा के साथ काम किया, जिसके दम पर मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में सिरमौर बना।
अचानक सेवा समाप्ति से गहराया संकट
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 31 दिसंबर 2019 को अचानक संचालक महोदय के आदेश से प्रदेश के लगभग 27 हजार किसान मित्रों और दीदियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था। बावजूद इसके, कृषि और किसानों से भावनात्मक लगाव के चलते वे आज भी विकासखंड व जिला स्तर पर अधिकारियों के निर्देश पर विभागीय गतिविधियों में निस्वार्थ सहयोग दे रहे हैं।
नई गाइडलाइन में प्रावधान, फिर भी फैसले का इंतजार
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आत्मा परियोजना की नई गाइडलाइन तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी ‘एनुअल एक्शन प्लान 2025-26’ में प्रति दो गांवों के बीच एक किसान मित्र/दीदी के लिए प्रोत्साहन राशि का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
संघ ने शासन से विनम्र आग्रह किया है कि पिछले 18 वर्षों से कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले इन किसान मित्रों/दीदियों को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि उनके लंबे जमीनी अनुभव का लाभ प्रदेश के किसानों और कृषि विकास को निरंतर मिलता रहे।
अजय पाल
