कटनी

मध्य प्रदेश।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक समय शासकीय स्कूल शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, लेकिन बदलते समय के साथ अब बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह शासकीय स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर, शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और नियमित निगरानी की कमी को माना जा रहा है।

 

कई शासकीय स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कुछ विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी है, तो कहीं विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता कम है। इसका सीधा असर बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और इसी कारण निजी स्कूलों का विकल्प चुन रहे हैं।

 

निजी स्कूलों की ओर क्यों बढ़ रहा रुझान?

 

निजी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम, नियमित टेस्ट, गृहकार्य, अनुशासन, अभिभावकों से संवाद और विभिन्न गतिविधियों पर अधिक जोर दिया जाता है। यही कारण है कि कई अभिभावक आर्थिक दबाव के बावजूद अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं।

 

वहीं, शासकीय स्कूलों में सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित किए जाने के बावजूद ,जमीनी स्तर पर उनका अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचने में कई जगह चुनौतियां सामने आती हैं। स्कूल भवन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, फर्नीचर, खेल सामग्री और डिजिटल शिक्षा जैसी सुविधाओं की स्थिति भी अलग-अलग विद्यालयों में अलग-अलग दिखाई देती है।

 

पढ़ाई के साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल

 

कई विद्यालयों में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास कंप्यूटर और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं। लेकिन इन संसाधनों का नियमित और प्रभावी उपयोग होना भी जरूरी है। केवल उपकरण उपलब्ध करा देने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता ।इसके लिए प्रशिक्षत शिक्षक नियमित मॉनिटरिंग और संसाधनों का सही उपयोग आवश्यक है ।

 

अभिभावकों में बढ़ रही चिंता

 

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से वे निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं ।उनका मानना है कि यदि शासकीय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो, शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं ले और बच्चों की पढ़ाई पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जाए ,तो सरकारी स्कूलों में भी विद्यार्थियों का रुझान बढ़ सकता है ।

 

व्यवस्था सुधारने की जरूरत

 

शासकीय स्कूलों को मजबूत करने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। विद्यालयों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, नियमित उपस्थिति ,गुणवत्तापूर्ण शिक्षण ,समय-समय पर शैक्षणिक मूल्यांकन और अधिकारियों द्वारा प्रभावी निरीक्षण जरूरी है साथ ही अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद भी स्थापित किया जाना चाहिए।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं ऐसे में इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था मजबूत होना सामाजिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है ।यदि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। तो अभिभावको पर निजी स्कूलों की फीस का आर्थिक बोझ भी कम हो सकता है ।

शासकीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर करना केवल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नहीं ,बल्कि समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बेहद सुविधा और जवाब देह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो निजी स्कूलों की ओर बढ़ता एक तरफ रुझान कम किया जा सकता है। जरूर इस बात की है। कि सरकारी स्कूलों की कमियों को केवल कागजों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर दूर किया जाए। ताकि हर बच्चे को  बेहतर और समान शिक्षा का अवसर मिल सके‌‌ ।

 

पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट

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