डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में अवसरों के असमान वितरण पर उठे सवाल, रेल लाइन नहीं होना कहीं डिंडौरी के बुजुर्गों की राह में बाधा तो नहीं?

डिंडौरी। मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना को लेकर डिंडौरी जिले में अवसरों के वितरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार पड़ोसी उमरिया जिले से योजना के तहत श्रद्धालुओं को चौथी बार जगन्नाथपुरी तीर्थयात्रा पर भेजे जाने की तैयारी है, जबकि डिंडौरी जिले के श्रद्धालुओं को तीर्थदर्शन यात्रा के लिए पिछले 4 वर्षो से अब तक ऐसा अवसर नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। यदि यह स्थिति आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम में भी ऐसी ही है तो सवाल स्वाभाविक है कि आखिर डिंडौरी के बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के साथ अवसरों में यह अंतर क्यों?

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का उद्देश्य पात्र वरिष्ठ नागरिकों को प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा का अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में पड़ोसी जिले को तीर्थदर्शन के लिए बार-बार अवसर मिलने और डिंडौरी को अपेक्षाकृत कम अवसर मिलने की स्थिति जिले के लिए चिंता का विषय बनती है।

साल में मौका मिला भी तो सीमित यात्रियों की बात

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि डिंडौरी को योजना में अवसर मिलने पर प्रत्येक जनपद क्षेत्र से सीमित संख्या में ही यात्रियों को शामिल किया जाता है। जिले की बड़ी ग्रामीण और आदिवासी आबादी को देखते हुए यदि प्रत्येक जनपद से महज 10 से 15 लोगों के आसपास ही अवसर मिलता है, तो बड़ी संख्या में पात्र बुजुर्ग योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि पिछले कुछ वर्षों में डिंडौरी जिले को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत कितनी यात्राएं आवंटित हुईं, कितने यात्रियों को लाभ मिला और पड़ोसी जिलों की तुलना में जिले का आवंटन कितना रहा।

रेलवे लाइन नहीं तो क्या तीर्थयात्रा का अवसर भी नहीं?

डिंडौरी जिले में रेल सुविधा नहीं होना पहले से बड़ी समस्या है। मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में यात्रा सामान्यतः निर्धारित प्रस्थान व्यवस्था के अनुसार कराई जाती है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या जिले में रेलवे स्टेशन नहीं होने के कारण डिंडौरी को पर्याप्त यात्राएं नहीं मिल पा रही हैं?

यदि ऐसा है तो सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। पात्र यात्रियों को बसों के माध्यम से नजदीकी निर्धारित रेलवे स्टेशन तक पहुंचाकर यात्रा में शामिल किया जा सकता है। केवल भौगोलिक या परिवहन संबंधी कठिनाई किसी जिले के पात्र बुजुर्गों के लिए अवसर कम होने का आधार नहीं बननी चाहिए।

जिले के जनप्रतिनिधियों की पैरवी पर भी सवाल

मामला केवल शासन स्तर पर यात्रा आवंटन का ही नहीं, बल्कि जिले के जनप्रतिनिधियों की पैरवी का भी है। डिंडौरी से विधायक, सांसद सहित कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि विभिन्न स्तरों पर जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में सवाल है कि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में जिले को पर्याप्त अवसर दिलाने के लिए अब तक कितनी प्रभावी पहल की गई?

यदि पड़ोसी जिलों को बार-बार अवसर मिल सकता है तो डिंडौरी को क्यों नहीं? क्या जिले की ओर से शासन के समक्ष पर्याप्त मांग नहीं रखी जा रही, या यात्रा कार्यक्रम तय करते समय डिंडौरी को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही? इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों से अपेक्षित है।

सरकार स्पष्ट करे—आखिर डिंडौरी से भेदभाव क्यों?

मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना प्रदेश के पात्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए है और इसका लाभ जिलों के बीच न्यायसंगत तरीके से पहुंचना चाहिए। डिंडौरी जैसे आदिवासी बहुल और रेल सुविधा से वंचित जिले के बुजुर्गों के लिए तो ऐसी सरकारी व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है।

अब आवश्यकता है कि शासन और जिला प्रशासन यात्रा आवंटन के आंकड़े सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही डिंडौरी के जनप्रतिनिधि भी सरकार के समक्ष जिले के लिए अधिक यात्राएं और पर्याप्त सीटें सुनिश्चित कराने की मांग मजबूती से रखें। आखिर तीर्थदर्शन का अवसर पड़ोसी जिले को बार-बार और डिंडौरी को इंतजार क्यों—यह सवाल अब जवाब मांगता है।

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