‘ अपने ही सवालों के घेरे में क्यों आ जाती है कांग्रेस ‘
‘ उठाया गया हर मुद्दा , आखिर गले की फांस क्यों बन जाता है ‘
लेखक राकेश झा मंडला
पता नहीं , कुछ लोगों को उड़ता तीर लेने का गजब का शौक होता है । हालांकि उनकी मंशा कुछ और होती है , किन्तु नतीजा हर बार कुछ और ही निकलता है । ऐसा ही शौक कांग्रेस ने भी पाल रखा है । कांग्रेस के चिर युवा नेता राहुल गांधी , जब – जब भाजपा , विशेषतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक रूप से कठघरे में खड़े करने की पुरजोर कोशिश करते हैं , पता नहीं कैसे , वे स्वयं को कठघरे में खड़ा पाते हैं । अभी हाल में ही प्रधानमंत्री ने सोना न खरीदने एवं विदेश यात्रा कम करने जैसी कुछ अपील जन सामान्य से कीं । राहुल गांधी ने आव देखा न ताव खट से श्री मोदी को घेरने के उद्देश्य से टूट पड़े । समर्थकों और अन्य विपक्षी दलों को मौका मिला , वे भी चील – कौव्वों की भांति प्रधानमंत्री को लेकर अपनी अभिव्यक्ति एवं उपस्थिति दर्ज कराने लगे । सोशल मीडिया में तूफान से उठ गया । हर कोई प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से लेकर उनके साथ चलने वाले काफ़िले पर उंगली उठाने लगे । शह और मात के इस खेल में न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने साथ चलने वाले वाहनों की संख्या आश्चर्यजनक से कटौती के आदेश दे दिए , बल्कि तुरन्त उनके पालन के फोटो सोशल मीडिया में दृष्टिगोचर होने लगे । वैसे , बहुत से जानकारों ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की । क्योंकि , प्रधानमंत्री का अपना प्रोटोकॉल होता है । उनके साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मी या वाहन किसी प्रदर्शन के लिए नहीं होते हैं । वे प्रधानमंत्री पद पर विराजमान व्यक्ति के लिए बनाए गए संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत होते हैं । लेकिन , हमारे देश में राजनीति अपनी गिरावट के चरम पर है । यहां हर बात पर आघात प्रधानमंत्री पर ही किया जाता है । सारी नसीहतें सत्ताधारी पार्टी के लिए ही होती हैं । विपक्ष भले ही उन पर अमल न करे । क्योंकि , एक ऐसी मानसिकता निर्मित हो चुकी है , कि सारी जवाबदेही सरकार की । विपक्षी दल केवल सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए हैं । जिम्मेदारियों से उनका दूर – दूर तक कोई लेना – देना नहीं । पेट्रोलियम पदार्थों की बचत वाली अपील के चलते , प्रधानमंत्री ने स्वयं के काफिले को कम किया , तो भाजपा के अन्य नेताओं ने बिना देर किए अपने साथ चलने वाले वाहनों के काफिले की संख्या में आनन – फानन में कटौती की न केवल घोषणा की , वरन उस पर अमल करना प्रारंभ कर दिया । अमित शाह , गृहमंत्री भारत सरकार , आचार्य देवव्रत , राज्यपाल गुजरात , डॉ मोहन यादव , मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश , देवेंद्र फडणवीस , मुख्यमंत्री महाराष्ट्र , एकनाथ शिंदे , उपमुख्यमंत्री महाराष्ट्र , सम्राट चौधरी , मुख्यमंत्री बिहार , हर्ष संघवी , गृहराज्य मंत्री गुजरात , विजय कुमार चौधरी , उपमुख्यमंत्री बिहार , आशीष सूद , मंत्री दिल्ली , आशीष शेलार , मंत्री महाराष्ट्र , शम्भूराज देसाई , मंत्री महाराष्ट्र ये कुछ ऐसे नामचीनी राजनेता हैं , जिन्होंने बिना देर किए , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आव्हान पर डीजल – पेट्रोल की बचत हेतु , तुरंत निर्णय लिया ।
किन्तु , बात यहीं खत्म नहीं हुई । भाजपा के प्रवक्ता और आईटी सेल व्यस्त हो गए । उन्होंने राहुल गांधी की 2004 से 2026 तक की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड को खंगाल डाला । अब वे सारे सवाल जो राहुल गांधी , कांग्रेस और इनके सहयोगी दलों के नेता भाजपा और नरेंद्र मोदी पर दाग रहे थे , वही सारे सवाल कांग्रेस और उसकी सहयोगी दलों के गले में हड्डी बनकर अटक गए हैं । भाजपा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर जो आंकड़े मीडिया और सोशल मीडिया के सामने लाये हैं , वे निःसन्देह विचारणीय हैं । भाजपा के अनुसार पिछले बाइस सालों में ( 2004 से 2026 ) राहुल गांधी ने 54 विदेश यात्रायें की हैं । यूरोप , अमेरिका और एशिया के ग्यारह देश । बाइस वर्षों में इन विदेशी यात्राओं का अनुमानित खर्च ₹ 60 करोड़ । जो कि उनके द्वारा घोषित आय से लगभग पांच गुना है । केवल 2015 की दक्षिण – पूर्व एशिया यात्रा का खर्च 4.5 करोड़ है , जो कि श्री गांधी की उस वर्ष की घोषित आय से पांच गुना है । अब भाजपा लगातार यह सवाल पूछ रही है , कि राहुल गांधी की इन विदेश यात्राओं का खर्च कौन उठा रहा था । यदि , यह खर्च विदेशी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा उठाया गया है , तो यह विदेशी अंशदान ( विनियनम ) अधिनियम 2010 ( FCRA ) के तहत पूर्व स्वीकृति के बिना अवैध है ।
कुछ तो खासियत है , राहुल गांधी और उनके सलाहकारों में , कि जब कभी कोई मुद्दा केंद्र सरकार या नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए उठाते हैं , छणिक हलचल के पश्चात वह मुद्दा औंधे मुंह जा गिरता है । मुश्किल यह है , कि न केवल मुद्दा औंधे मुंह गिरता है , बल्कि पार्टी के लिए गले की फांस बन जाता है । पार्टी के अन्य नेताओं को राहुल गांधी के बचाव में उतरना पड़ता है । बार – बार शर्मिंदा होना पड़ता है । किंतु , न तो राहुल गांधी सुधरते हैं और ना ही कांग्रेस । अभी कुछ दिनों पहले ही असम चनावों के समय वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्बा सरमा की पत्नी के दो पासपोर्ट होने के दावे करके अपनी और कांग्रेस की फ़जीहत करवाई थी । किन्तु , हम नहीं सुधरेंगे के अंदाज में कांग्रेस चलती चली जा रही है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोलियम पदार्थों की बचत और विदेश यात्राओं पर नियंत्रण की जनता से की गई अपील के जवाब में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर तंज तो कसा , परन्तु अब वही उलाहना , वही तंज कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए मुसीबत बन चुका है । आने वाला समय बताएगा , कि यह मुद्दा क्या गुल खिलायेगा।
मंडला से अशोक मिश्रा
