जमुना में चोरी के कोयले से धधक रहे ईंट भट्टे!
अनूपपुर। भालूमाड़ा थाना के जमुना क्षेत्र में संचालित कुछ ईंट भट्टों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में संचालित कई ईंट भट्टों तक बड़ी मात्रा में चोरी का कोयला पहुंचाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हरद रेलवे साइडिंग तथा बंद पड़ी खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालकर उसे दलालों और कथित कोयला चोरों के माध्यम से ईंट भट्टों तक पहुंचाया जाता है। यही कारण है कि क्षेत्र में लंबे समय से कोयला चोरी का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। प्रतिदिन चोरी का कोयला अलग-अलग माध्यमों से ईंट भट्टों तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए कथित तौर पर अलग-अलग लोगों को लगाया गया है, जो बंद खदानों और रेलवे क्षेत्र से कोयला इकट्ठा कर बाइक और साइकिल अन्य साधनों से भट्टों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद उसी कोयले से ईंट पकाने का काम किया जाता है।
गांव के समीप संचालित हो रहे ईंट भट्टे
जमुना बस्ती के आसपास आबादी से सटे क्षेत्रों में भी ईंट भट्टे संचालित होने की बात सामने आ रही है। भट्टों से निकलने वाला धुआं और राख वातावरण को प्रदूषित कर रही है। इससे आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि ईंट भट्टे निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं तो संबंधित विभाग को तत्काल जांच करनी चाहिए।
कोयला चोरी रोकने में नाकाम व्यवस्था?
क्षेत्र में चर्चा है कि हरद रेलवे साइडिंग और बंद पड़ी खदानों से लगातार कोयला चोरी हो रही है। इसके बावजूद चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। यदि नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की जाए तो इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है। लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की है, लेकिन कोयला चोरी का सिलसिला लगातार जारी रहने से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
ईंट भट्टों के संचालन के लिए क्या हैं नियम?
ईंट भट्टा संचालित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है।राजस्व विभाग एवं स्थानीय निकाय से भूमि उपयोग संबंधी अनुमति आवश्यक होती है। भट्टा आबादी, स्कूल, अस्पताल तथा सार्वजनिक स्थानों से निर्धारित दूरी पर होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। ईंधन के रूप में प्रतिबंधित या चोरी की सामग्री का उपयोग पूरी तरह अवैध है। श्रम कानूनों का पालन, मजदूरों की सुरक्षा तथा बाल श्रम निषेध के नियमों का पालन भी आवश्यक होता है। यदि कोई ईंट भट्टा इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध जुर्माना, संचालन पर रोक तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी तथा पुलिस संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाएं। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि सभी ईंट भट्टे निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि सरकारी संपत्ति की चोरी पर रोक लगे, पर्यावरण की रक्षा हो सके और वैध कारोबार करने वालों के साथ अन्याय न हो। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रभावी कार्रवाई से ही क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे इस कथित अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
रिपोर्टर दिनेश केवट
अनुपपुर







