PM मोदी के ‘मन की बात’ वाले विचारपुर को विद्युत विभाग ने धकेला अंधेरे में: शहरी फीडर हटाकर जारी किया तुगलकी फरमान
शहडोल। संभागीय मुख्यालय से सटा गांव विचारपुर इन दिनों भीषण गर्मी के मौसम में अघोषित बिजली कटौती के नर्क को झेलने को मजबूर है। यह वही ऐतिहासिक ग्राम गांव है, जिसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में याद कर विश्व पटल पर चमकाया था। लेकिन आज इसी आदर्श गांव को बिजली विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण भीषण गर्मी में तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।
पूर्व की व्यवस्था को किया दरकिनार, थोपा नया फरमान
विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने पूर्व से सुचारू रूप से चल रही व्यवस्थाओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। गर्मी के इस रिकॉर्ड तोड़ मौसम में, जब आम जनता को निर्बाध बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब विभाग ने एक नया और अजीबोगरीब फरमान जारी कर दिया। विचारपुर में पहले शहरी फीडर से विद्युत आपूर्ति की जाती थी, जिसके चलते ग्रामीणों को कभी बिजली संकट या कटौती की बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन अचानक अधिकारियों की मनमानी के चलते इस व्यवस्था को बदल दिया गया।
प्रधानमंत्री के विजन को ठेंगा दिखा रहा बिजली विभाग
हैरानी की बात यह है कि जिस गांव की तारीफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं और जिसे देश-दुनिया में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, उसे विद्युत विभाग के ‘तुगलकी फरमान’ ने समस्याओं के दलदल में धकेल दिया है। एक तरफ सरकार ग्रामीण विकास और सुचारू व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ संभागीय मुख्यालय की नाक के नीचे बैठा विद्युत विभाग प्रधानमंत्री के विजन को ही ठेंगा दिखा रहा है।
आक्रोश में ग्रामीण, आंदोलन की सुगबुगाहट
शहरी फीडर से काटकर विचारपुर को ग्रामीण क्षेत्र की अव्यवस्थित लाइन से जोड़ दिया गया है, जिसके बाद से २४ घंटे में से कई-कई घंटे बिजली गायब रहती है। भीषण गर्मी और उमस के बीच बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग बेहाल हैं। ग्रामीणों में इस तानाशाही रवैए के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने तत्काल अपना यह जनविरोधी फैसला वापस नहीं लिया और विचारपुर को वापस शहरी फीडर से जोड़कर बिजली बहाल नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बिजली विभाग जागता है या फिर ‘मन की बात’ के इस गौरवशाली गांव को यूं ही अंधेरे और कटौती के हवाले छोड़ रखता है।
अजय पाल
