शहडोल। जिले के अमलाई थाना क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चालक द्वारा अपने ही मालिक के ट्रकों से लाखों रुपये का डीजल चोरी करने का आरोप लगा है। चोरी और धांधली की पूरी वारदात सीसीटीवी (CCTV) फुटेज एवं तस्वीरों में कैद हो चुकी है, जो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रही हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
साठगांठ कर ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम
प्रसारित सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंप पर वाहनों में ईंधन भरवाते समय ट्रकों के फ्यूल टैंक के साथ-साथ प्लास्टिक के बड़े केन में भी डीजल भरा जा रहा है। आरोप है कि चालक, पेट्रोल पंप कर्मियों की कथित मिलीभगत से वाहन मालिक को पूरे टैंक का बिल देता था, जबकि केन में भरा गया डीजल अवैध रूप से बाजार में बेच दिया जाता था।
सालों से चल रहा था खेल, कम माइलेज से हुआ शक
नौरोजाबाद (जिला उमरिया) निवासी पीड़ित वाहन मालिक अब्दुल खान के अनुसार, चालक लंबे समय से उनके वाहनों—जिनमें MP54-ZB-4860, MP18-ZJ-4677, MP20-ZV-4430 जैसे भारी वाहन शामिल हैं—से यह धोखाधड़ी कर रहा था। गाड़ियों का माइलेज लगातार कम आने पर जब आंतरिक जांच की गई और पेट्रोल पंपों के सीसीटीवी खंगाले गए, तब इस संगठित वित्तीय नुकसान और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
SP की चौखट पर पहुँचा पीड़ित
मामले में थाना स्तर पर सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों का रुख किया है। अब्दुल खान के मुताबिक:
31 जुलाई 2026: अमलाई थाने में पहली लिखित शिकायत दी गई।
3 अगस्त 2026: सीसीटीवी साक्ष्यों के साथ पुनः पुलिस को अवगत कराया गया।
7 अगस्त 2026: थाना स्तर पर कार्रवाई न होने से व्यथित होकर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) शहडोल को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग की।
ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय व्यवसायियों में रोष
डिजिटल साक्ष्य (CCTV फुटेज), संदिग्ध चालक की पहचान और वाहन क्रमांक स्पष्ट होने के बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज न होने से स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों में आक्रोश है। कारोबारियों का कहना है कि स्पष्ट सबूतों के बाद भी कार्रवाई में देरी से कानून व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में मामला आने के बाद अमलाई पुलिस क्या कदम उठाती है और आरोपी चालक पर कब तक शिकंजा कसा जाता है।
अजय पाल







