स्कूल की ₹2.50 लाख फीस का हिसाब कहां है साहब? शाला प्रबंधन समिति ने प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल, कलेक्टर से जांच की मांग
गरियाबंद। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ग्राम पौंड की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के अध्यक्ष गोपाल साहू ने विद्यालय की वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला कलेक्टर गरियाबंद से लिखित शिकायत कर निष्पक्ष जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में विद्यार्थियों से प्राप्त शुल्क राशि का स्पष्ट हिसाब प्रस्तुत नहीं करने, शाला प्रबंधन समिति के निर्णयों की अनदेखी, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की सूचना समिति को नहीं देने तथा विद्यालय का कबाड़ बिना आवश्यक प्रक्रिया के बेचने सहित कई बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है।

₹2.50 लाख की फीस, लेकिन हिसाब पर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में विद्यार्थियों से विभिन्न मदों में लगभग ₹2.50 लाख शुल्क प्राप्त हुआ है। आरोप है कि उक्त राशि का पूर्ण आय-व्यय विवरण, बैंक स्टेटमेंट एवं संबंधित वित्तीय अभिलेख शाला प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। समिति द्वारा बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद हिसाब उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने पूरे वित्तीय लेन-देन की दस्तावेजी जांच की मांग की है।
समिति के अधिकार और प्रस्ताव को लेकर भी विवाद
शिकायत में कहा गया है कि पारदर्शिता के उद्देश्य से समिति द्वारा आय-व्यय का विवरण मांगा गया था, लेकिन कथित तौर पर समिति को हिसाब मांगने के अधिकार को लेकर आपत्ति जताई गई। वहीं, समिति की बैठक में एक सप्ताह के भीतर स्टेटमेंट प्रस्तुत करने का प्रस्ताव/निर्णय लिए जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है। इससे समिति की भूमिका और विद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
साइकिल वितरण कार्यक्रम की सूचना नहीं देने का आरोप
शिकायत में विद्यार्थियों के साइकिल वितरण कार्यक्रम की जानकारी शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को नहीं देने और उन्हें आमंत्रित नहीं किए जाने का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने इसे विद्यालय की गतिविधियों में समिति की सहभागिता एवं सूचना व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी भी जांच की मांग की है।
कबाड़ बिक्री में प्रक्रिया और राशि के उपयोग पर सवाल
शिकायत का एक महत्वपूर्ण बिंदु विद्यालय के कबाड़ की बिक्री से संबंधित है। अध्यक्ष का आरोप है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच दो-तीन बार विद्यालय का कबाड़ बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने प्रशासन से जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कबाड़ में कौन-कौन सी सामग्री थी, उसकी बिक्री किस प्रक्रिया एवं सक्षम अनुमति के तहत हुई, किसे बेची गई, कितनी राशि प्राप्त हुई तथा प्राप्त राशि को विद्यालय के किस कार्य में खर्च किया गया।
शाला प्रवेशोत्सव को लेकर भी मांगी जांच
समिति अध्यक्ष ने विद्यालय स्तर पर शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन नहीं किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग की है। उन्होंने संबंधित विभागीय निर्देशों एवं विद्यालय के अभिलेखों का परीक्षण कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि निर्धारित प्रक्रिया एवं निर्देशों का पालन हुआ था अथवा नहीं।
कलेक्टर से दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं दस्तावेज आधारित जांच कराई जाए। इसके लिए शुल्क वसूली की रसीदें, कैशबुक/लेखा अभिलेख, बैंक स्टेटमेंट, आय-व्यय विवरण, शाला प्रबंधन समिति की बैठक कार्यवाही, कबाड़ बिक्री से संबंधित प्रस्ताव, अनुमति, बिक्री रसीद एवं प्राप्त राशि के उपयोग सहित अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान लेकर नियमों के अनुरूप तथ्यात्मक निष्कर्ष निकाला जाए।
अब जांच पर टिकी निगाहें
समिति अध्यक्ष का कहना है कि शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से आरोपित करना नहीं, बल्कि विद्यालय की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों से प्राप्त राशि एवं विद्यालय की संपत्तियों के उपयोग का स्पष्ट हिसाब सामने लाना है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच से पुष्टि होना शेष है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि ₹2.50 लाख की शुल्क राशि का वास्तविक आय-व्यय क्या है? कबाड़ बिक्री से कितनी राशि प्राप्त हुई और उसका उपयोग कहां हुआ? अब इन सवालों का जवाब दस्तावेजी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद







