*20 वर्षों से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से मुक्त रखने की मांग, शिक्षक कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन*
शहडोल:-मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस, शहडोल द्वारा देश और प्रदेश के लाखों अनुभवी शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संगठन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से देश के माननीय प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया है। इस ज्ञापन के जरिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत पुराने और अनुभवी शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई पात्रता परीक्षा को निरस्त करने की मांग की गई है।
शिक्षक कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले राज्य सरकारों की स्थापित नीतियों और निर्धारित नियमों के तहत हुई थीं। वर्तमान में, शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधित भाग 2017 लागू होने के बाद, कानून पारित होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। संगठन का तर्क है कि भूतलाक्षी (बैकडेटेड) आधार पर लागू होने वाला यह देश का ऐसा पहला कानून होगा, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इस कानून के दायरे में आने से मध्य प्रदेश के करीब 50 लाख शिक्षकों सहित देश के लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि 20 वर्षों से अधिक समय तक शासकीय सेवा देने और देश की नई पीढ़ी का भविष्य संवारने के बाद, इस उम्र में उच्च मानक स्तर की परीक्षा लिया जाना पूरी तरह अनुचित है। यह शिक्षकों के लंबे शासकीय अनुभव और समर्पण का सही मूल्यांकन नहीं है।
मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने मांग की है कि संशोधित शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2017 को पुनः संशोधित किया जाए और कानून लागू होने से पहले नियुक्त हो चुके सभी अनुभवी शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान चांद सिंह पट्टावी (संभागीय अध्यक्ष), अख्तर हुसैन (अध्यक्ष), कमलेश मिश्रा, केदार मिश्रा समेत संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे
*अजय पाल*







