डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
मेंहदवानी (डिंडौरी)। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच मेंहदवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार को तहसीलदार तेजी लाल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अस्पताल की कई बुनियादी कमियां उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान जनरेटर लंबे समय से बंद मिला, वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी निष्क्रिय पाए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों की सत्यता परखने के लिए तहसीलदार अचानक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और मौके पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में सामने आया कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अस्पताल के पास कोई प्रभावी पावर बैकअप उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली कटौती में बढ़ जाती है परेशानी
अस्पताल में जनरेटर बंद होने के कारण बिजली जाने पर वार्डों में पंखे और अन्य आवश्यक उपकरण बंद हो जाते हैं। भीषण गर्मी के बीच भर्ती मरीजों, महिलाओं और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से उपचार के लिए आने वाले लोगों ने भी व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद पाए गए। ऐसे में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने के साथ किसी भी अप्रिय घटना की निगरानी करना मुश्किल हो सकता है। मरीजों और उनके परिजनों ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।
तत्काल सुधार के दिए निर्देश
व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर तहसीलदार ने मौके पर मौजूद जिम्मेदार कर्मचारियों और खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. रणमत परस्ते को फटकार लगाते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बंद पड़े जनरेटर और सभी सीसीटीवी कैमरों को तत्काल दुरुस्त कर चालू कराने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल में पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी शीघ्र सुधारने को कहा।
सुधार की राह देख रहे मरीज
तहसीलदार के निरीक्षण के बाद अब मरीजों और क्षेत्रवासियों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं। सवाल यह है कि प्रशासनिक निर्देशों के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं में कितनी तेजी से सुधार होता है और ग्रामीणों को कब तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाती हैं।







