डिंडौरी मध्यप्रदेश
महीने बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
डिंडौरी/शहपुरा
शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजौरीमाल में नल-जल योजना के रखरखाव कार्य में वित्तीय अनियमितता के मामले में जिला पंचायत द्वारा पारित वसूली आदेश के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, जिला पंचायत डिंडोरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 20 फरवरी 2026 को पारित आदेश में ग्राम पंचायत बिजौरीमाल की सरपंच धरमी बाई और सचिव मनोहर सिंह से कुल 1 लाख 76 हजार 360 रुपये की वसूली करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि दोनों से बराबर-बराबर 88,180 रुपये सात दिनों के भीतर जमा कराए जाएं, अन्यथा मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम और भू-राजस्व संहिता के तहत वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
एक महीने बाद भी वसूली नहीं
आदेश पारित हुए एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक राशि की वसूली नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब स्वयं जिला पंचायत स्तर से आदेश जारी हो चुका है तो फिर संबंधित अधिकारियों द्वारा उस पर अमल क्यों नहीं कराया जा रहा।
जांच में सामने आई थी अनियमितता
जनपद स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा नल-जल योजना के रखरखाव और मरम्मत कार्यों के नाम पर बिना ग्रामसभा की स्वीकृति के 1,76,360 रुपये खर्च किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि
* कार्यों के लिए ग्रामसभा से अनुमोदन नहीं लिया गया
* 25 हजार से अधिक के बिलों का विधिवत सत्यापन नहीं कराया गया
* पंचों के फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत भी सामने आई
इन तथ्यों के आधार पर सरपंच और सचिव को शासकीय राशि के दुरुपयोग का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए वसूली का आदेश दिया गया था।
सुनवाई के बाद दिया गया था आदेश
प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए कई अवसर दिए गए थे, लेकिन वे अपने बचाव में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद जिला पंचायत ने दोनों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई तय की।
कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आदेश में स्पष्ट रूप से सात दिन के भीतर राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया था, तो फिर इतने समय बाद भी वसूली क्यों नहीं हो पाई। इस मामले में प्रशासन की ढिलाई से पंचायतों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया







