संवाददाता बिरेश शुक्ल
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किशोर की मौत पर बोले सुपरीटेंडेंट, आकाशीय बिजली से घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती 72 घंटे अति संवेदनशील, दोषी अधिकारी कर्मचारी से माँगा गया स्पष्टीकरण, परिजनों की हड़बड़ाहट के चलते कहीं नहीं हो पाया व्यवस्थित उपचार
आकाशीय बिजली से घायल होने के कारण महोबा से रीवा संजय गांधी अस्पताल पहुंचे 14 वर्षीय किशोर की मौत के मामले में अस्पताल अधीक्षक ने अंतर विभागीय समन्वय न बनाने वाले अधिकारी कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा है साथ ही अधीक्षक ने यह भी कहा है कि अस्पताल प्रबंधन किसी भी दोषी अधिकारी कर्मचारी के साथ नरमी के साथ पेश नहीं आएगा। डॉक्टरों की टीम द्वारा रिपोर्ट दिए जाने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि 30 सितंबर को आकाशीय बिजली की चपेट में आए 13 वर्षीय मनीष को परिजनों द्वारा महोबा बांदा सहित पन्ना की अस्पतालों में उपचार करने के बाद 3 अक्टूबर की रात लगभग 8:00 बजे संजय गांधी अस्पताल लाया गया
जहां गंभीर अवस्था में किशोर का उपचार शुरू किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक आकाशीय बिजली से प्रभावित लोगों के लिए शुरुआती 72 घंटे अति संवेदनशील माने जाते हैं इस दौरान सही उपचार मिल जाने से घायल की जान बचाए जाने की संभावना बन जाती है लेकिन इस अवधि में अगर घायल को सही उपचार नहीं मिला तो उसके बचने के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं किशोर की मौत का वास्तविक कारण क्या रहा इसका खुलासा तो पीएम रिपोर्ट आने के बाद होगा लेकिन उपचार शुरू करने में अधिकारी कर्मचारी द्वारा बरती गई लापरवाही के मामले में प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण की

