आजादी अभी बहुत दूर है..
कटनी मध्य प्रदेश
दशरमन अज्ञात कलम से
आजादी केवल राजनीतिक नहीं है, आजादी हमें सामाजिक मानमिक स्तर में भी चाहिए।आइये इस स्वतंत्रता के पावन अवसर पर हर उस प्रकार की आजादी को हम जाने जिसमें –
हर डर से हम आजाद हो,
हर गलत आदतों से आजाद हो हर बुराईमों से आजाद हो..
हर नकारात्मकता से आजाद हो हर घृणा से आजाद हो
हर स्वजातीय केन्द्रियवाद से आजाद हो
हर प्रकार की चाटुकारिता से आजाद हो
हर प्रकार की स्वामीभक्ति से आजाद हो
तभी हमारी आजादी का असली मतलब है वरना हम अभी भी गुलाम हैं।
स्वतंत्रता केवल राजनीतिक रूप से नहीं, यह हमें सामाजिक, आर्थिक, मानसिक, बौद्धिक रूप से भी जरूरी है।
जब तक हम हर प्रकार की नकारात्मकता, बृणा, ध्वेश आदि स मुक्त नहीं होते तब तक वास्तविक आजादी हमसे कोषों दूर है। हमें उम्मीद है आप इन बातों की समझेंगेन
शिक्षक अपना शिक्षक धर्म निभाएं, विद्यार्थी अपना विद्यार्थी धर्म निभायें. अभिवावक अपना धर्म निभाते हुए बच्चों को हर नकारात्मकता, छल, कपट, द्वेष के प्रति सजग कर उनके लिए एक बेहतर भविष्य सकारात्मक दृष्टिकोण, बड़ों का सम्मान, अच्छे-संस्कार व अपनी संस्कृति के माध्यम से गढ़ा हो।
हमें केवल और केवल उत्तम व्यक्तित्व का आभूषण ही धारण करना है। अगर ये नहीं कर पा रहे तो हम गुलाम है।
जब तक हम एक उत्तम मनुष्य नहीं बनते, तब तक इस आजादी का कोई मतलब नहीं।
देश आजाद है लेकिन हम गुलाम हैं
हम डर की गुलामी कर रहे है,
हम नकारात्मकता की गुलामी कर रहे है,
हम संकीर्णता की गुलामी कर रहे हैं
हम घृणा की गुलामी कर रहे हैं,
इन सबसे आजाद होगे तभी सफलता हमारे चरणों का वंदन करेगी।
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कहते हैं हर कण में ईश्वर का वास होता है, मतलब हमारी हर जुवान हर सोच में ईश्वर का वास है।
हम जितने काम कर रहे है परमात्मा के पास उसका लेखा-जोखा एकत्रित ही रहा है।
हमें इतना सक्षम बनना बनना है कि हम अपने सही गलत का फैसला स्वयं कर सकें।
ये दुनियाँ कर्मों से ही चल रही है. जैसा करोगे वैसा भरोगे गलत बोलोगे गलत सुनने को मिलेगा गलत करोगे बगलत भरोगे दुःख दोगे दुःख मिलेगा सुख दोगे सुख मिलेगा।
हमें आज से ही अपनी सभी गलत विचारधारा, सोच, व्यक्तित्व. गलत व्यवहार, सभी बुरे कर्मो को आजाद कर देना है।
केवल एक चीज की गुलामी करनी है. वो है सकारात्मकता की गुलामी केवल एक चीज की गुलामी करती है, वो है कर्म की गुलामी
केवल एक चीज की गुलामी करनी है, वो है. एक दूसरे के सहयोग की गुलामी इससे जीवन बेहतर होगा।
हम कहते है दुनिया में रिश्ते खराब है
हम कहते है लोग किसी की मदद नहीं करते।
हम मदद नहीं कर रहे इसलिए हमारे लिए हाथ आगे नहीं बढ़ते।
हम अपना हाथ तो आगे बढ़ाये, हम एक हाथ आगे बढ़ायेंगे तो चार हाथ हमारी मदद के लिए आगे आयेंगे।
लेकिन हम उंगली उठाने का काम करते है
उंगली उठाते समय हम ये नहीं देखते की वापस हमारी ओर कितनी उंगली उठ रही है।
दुनियाँ कैसी है ये मत देखिये
दुनियाँ को हम जैसा बोल रहे हैं. हम वैसे हैं
मेरी नजर में दुनियाँ अच्छी है क्योंकि मुझे अच्छी चीजें दिखती हैं।
में किसी की मदत करता हूँ तो मुझे वापस मदद मिलती है
भला करने पर लाभ होता है क्योंकि भला का उल्टा लाभ है। भला-लाभ
अनकन्डीशनल मदद मिलती है।
जब मैं खुद की कही ऐसा हुआ पाता हूँ तो चारों तरफ से मदद आती है मुझे लगता है ईखर चारों तरफ मेरे लिए मदद भेजता है।
क्योंकि मेरे जीवन में मैने कभी भी किसी के साथ न गलत करने का सोचा न गलत करने को बोला ।
यदि हम बुरे नहीं है तो कोई हमारा बुरानहीं करता ये है कर्म का सिद्धांत जिसका प्रतिफल यही मिलता है।
जो कर रहे हैं उसका परिणाम तुरंत मिलेगा हमारे पास ही आमेगी हमारी सोच, हमारी विचारधारा, हमारे कर्म । हम ही देश. प्रदेश का भविष्य है. हम ही गलत दिशा में जायेंगे तो
ये देश, प्रदेश भी गलत दिशा में जाएगा और हमारा जीवन भी इसलिए इस आजादी के पावन पर्व पर खुद की स्वतंत्र बनाइए हर उप नकारात्मकता से.
और आज खुद से में संकल्प ले कि हम कभी भी अपने कर्म थे. अपने धर्म से अपने सकारात्मक व्यक्तित्व से वंचित नहीं होगे। और एक सकारात्मक विचारधारा के मालिक स्वयं बनेगे।
हम भौगोलिक और राजनीतिक रूप से तो आजाद है परंतु मानसिक रूप से आज भी गुलाम है.
कई समाज आज भी कही न कही पिछड़े हैं उन सब की ऊपर उठान का कार्य हमें खुद ही करना होगा लेकिन उससे पहले हमें खुद को गढ़ना होगा।
आजादी अभी बहुत दूर है आजादी हमें अभी मिली नहीं है जब तक हम एक-दूसरे के मदद के लिए आगे नहीं आते जब तक हमें एक दूसरे की तकलीफ समझ नही आती. जब तक हम एक दूसरे के दर्द को नहीं समझते. जब तक हम एक दूसरे को आगे नही बढ़ति,
जब तक हम एक-दूसरे का सहारा नहीं बनते तब तक हम गुलाम ही रहेंगे।
इस लिए पुनः कहना चाहूंगी आजादी अभी भी बहुत दूर है।
सौरभ गर्ग ब्यूरो कटनी
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