डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
इस बार कस्तूरी पिपरिया और डोभी मिले बंद; पूर्व में अमठेरा, बांकी, करौंदी और पिपरिया कला में भी मिल चुका ताला, कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल
डिंडौरी/शहपुरा। ग्रामीणों की समस्याओं का पंचायत स्तर पर ही समाधान हो और उन्हें अपनी शिकायतों को लेकर जनपद व जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले की ग्राम पंचायतों में प्रत्येक मंगलवार जनसुनवाई आयोजित की जानी है। इसमें पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के साथ संबंधित हल्का पटवारी की मौजूदगी भी अपेक्षित है। लेकिन शहपुरा जनपद क्षेत्र में लगातार सामने आ रही तस्वीर इन निर्देशों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
मंगलवार को ग्राम पंचायतों में जनसुनवाई की स्थिति जानने के लिए कस्तूरी पिपरिया, रैपुरा, डोभी, कछारी और धीरवन कला पंचायतों का जायजा लिया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत कस्तूरी पिपरिया और डोभी के पंचायत भवनों में ताला लटका मिला। ऐसे में इन पंचायतों में जनसुनवाई के आयोजन और ग्रामीणों की समस्याएं सुनने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
पहले भी चार पंचायतों में मिल चुका है ताला
यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी मंगलवार की जनसुनवाई के दौरान शहपुरा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमठेरा, बांकी, करौंदी और पिपरिया कला के पंचायत भवन बंद और ताला लटका मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों को लेकर खबरें भी प्रकाशित की गई थीं। अब कस्तूरी पिपरिया और डोभी में भी यही स्थिति मिलने के बाद जनपद स्तर पर जनसुनवाई की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
यानी अलग-अलग मौकों पर अब तक कम से कम छह ग्राम पंचायतों में मंगलवार की जनसुनवाई के समय पंचायत भवन बंद मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं दिखाई देना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सचिवों को लगाया फोन, नहीं मिला जवाब
कस्तूरी पिपरिया और डोभी पंचायत भवन बंद मिलने के बाद स्थिति की जानकारी के लिए संबंधित पंचायत सचिवों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
लगातार ताले मिल रहे, आखिर कार्रवाई कब?
लगातार अलग-अलग पंचायतों में जनसुनवाई के दिन ताला मिलने के बावजूद यदि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही है तो सवाल जनपद पंचायत की निगरानी व्यवस्था पर भी खड़ा होता है। आखिर कलेक्टर के निर्देशों का पंचायत स्तर पर पालन हो रहा है या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? जनसुनवाई नहीं होने पर संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही?
अब देखना होगा कि जनपद पंचायत शहपुरा के सीईओ इस बार कस्तूरी पिपरिया और डोभी के मामले में जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हैं या फिर पंचायत भवनों पर ताले और कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है।

