शहडोल (मध्य प्रदेश)-जिला अध्यक्ष सरपंच संघ (ग्राम पंचायत- कुँआ, जनपद पंचायत- ब्यौहारी, जिला- शहडोल) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला शहडोल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरपंच संघ ने सीईओ को एक सप्ताह के भीतर जिले से हटाने की मांग की है, ऐसा न होने पर जिला पंचायत शहडोल पर धरना प्रदर्शन और कार्य बंद करने की चेतावनी दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, दिनांक 06 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे बोडरी की आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई अपनी एक समस्या को लेकर न्याय की गुहार लगाने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शहडोल के पास पहुंची थीं।
आरोप है कि सीईओ ने महिला सरपंच को न्याय देने के बजाय उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें अपने चैम्बर से हटा दिया और दोबारा ऑफिस न आने व सरपंच पद से बर्खास्त करने की धमकी दी।
नियमों और सम्मान के विरुद्ध कृत्य
सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष शिवेन्द्र सिंह “शिब्बू” और अन्य सरपंचों (जैसे फूलबाई, प्रज्ञा बसोर, राजकुमारी, राकेश आदि) के हस्ताक्षरित इस पत्र में कहा गया है कि एक निर्वाचित जन प्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार उनके सम्मान के विरुद्ध है। यह शासकीय सेवा आचरण नियमों और प्रशासनिक मर्यादा का खुला उल्लंघन है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त अधिकारी द्वारा पूर्व में भी कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम
सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुख्य कार्यपालन अधिकारी शहडोल का स्थानांतरण अन्य जिले में नहीं किया जाता है, तो पूरा सरपंच संघ कार्य बंद कर जिला पंचायत शहडोल के सामने उग्र धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि इस स्थिति में होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक बाधा की सारी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अजय पाल
