सालगिरह के बहाने ‘सियासी सेटिंग’! शहडोल से सिंगरौली तक थानेदार साहब की खास महफिल

 

शहडोल से लेकर सिंगरौली तक इन दिनों एक ‘खास’ सालगिरह की चर्चा जोरों पर है। पहली नजर में यह एक निजी आयोजन लगता है—शादी की 25वीं सालगिरह का जश्न। लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, कहानी सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं दिखती।

सोहागपुर में पदस्थ थानेदार साहब को अपने ही जिले में जश्न के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं मिला। नतीजतन, आयोजन का स्थल बना सिंगरौली—एक ऐसा जिला, जो सिर्फ ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि सियासी हलचलों के लिए भी जाना जाता है। अब यह चुनाव सुविधा का था या रणनीति का, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

इस निजी समारोह की सबसे खास बात रही मेहमानों की सूची। जहां प्रशासनिक अमले की उपस्थिति सीमित रही, वहीं राजनीतिक चेहरों की सक्रिय मौजूदगी ने कई संकेत दिए। कार्यक्रम में शामिल हुए कई ‘माननीय’ इस बात की ओर इशारा करते नजर आए कि यह सिर्फ व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का मंच भी था।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, थानेदार साहब की नजरें भविष्य की तैनाती पर टिकी हैं। ऐसे में सिंगरौली जैसे जिले में इस तरह का आयोजन, जहां प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों तक सीधी पहुंच बन सके, एक सोची-समझी कवायद माना जा रहा है। यानी जश्न की आड़ में ‘नेटवर्किंग’ का खेल खुलकर खेला गया।

विडंबना यह भी है कि जिस जिले में वे कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं के संसाधनों पर भरोसा नहीं जताया गया। इससे स्थानीय व्यवस्थाओं पर सवाल उठते हैं। क्या यह जिले की सुविधाओं की कमी है, या फिर सिंगरौली के ‘सियासी आकर्षण’ का प्रभाव?

जनता के बीच इस आयोजन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ इसे निजी पसंद मान रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

सालगिरह का जश्न तो खत्म हो गया, लेकिन इसके पीछे छिपे संदेश अभी भी चर्चा में हैं। अब देखना यह है कि यह महज एक आयोजन था या फिर किसी बड़े ‘पावर गेम’ की…

 

           अजय पाल

Leave A Reply

Exit mobile version