शीर्षक: श्रीराम कॉलेज की फीस फर्जीवाड़े में नया मोड़: पुत्र पर ‘फर्जी FIR’ और शारीरिक शोषण का आरोप लगाकर एसपी दफ्तर पहुंचे अधिवक्ता त्रिलोक सिंह ठाकुर

​पैराग्राफ 1:

जबलपुर जिला बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोक सिंह ठाकुर ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाते हुए इस हाई-प्रोफाइल मामले में सनसनीखेज मोड़ ला दिया है। एडवोकेट ठाकुर का आरोप है कि श्रीराम इंस्टीट्यूट के चेयरमैन आर.के. कलसुरिया और उनके सहयोगियों ने सुनियोजित तरीके से उनके पुत्र चंद्रमोहन सिंह को धारा 316-317 के तहत फर्जी मुकदमों में फंसाया है। मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह सामने आता है कि इंस्टीट्यूट और प्रबंधन से जुड़े अमित कोरी, दिलीप दुबे व रितेश लखेरा द्वारा वर्षों से छात्र चंद्रमोहन पर न सिर्फ मानसिक व शारीरिक दबाव बनाया जा रहा था, बल्कि चार करोड़ रुपये तक की जीएसटी और अन्य फर्जी वित्तीय लेनदेन की आड़ में उसे बलि का बकरा बनाने की साजिश रची गई। बैंक स्टेटमेंट इस बात के गवाह हैं कि सारा पैसा संस्थानों के बताए खातों और फर्जी कंपनियों में गया, जबकि चंद्रमोहन के हिस्से एक पैसा तक नहीं आया।

​पैराग्राफ 2:

पुलिस अधीक्षक के समक्ष निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं का यह प्रतिनिधिमंडल इस बात पर अड़ा है कि बिना किसी ठोस साक्ष्य, बयान या दस्तावेजी प्रक्रिया के दर्ज की गई इस एकतरफा FIR को तत्काल संशोधित या निरस्त किया जाए। एडवोकेट त्रिलोक सिंह ठाकुर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि वर्षों से जारी शारीरिक शोषण और दबाव की इस रणनीति की पारदर्शी एसआईटी या उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई जाती है, तो कानूनी बिरादरी अपने साथी के बेटे के सम्मान और न्याय की लड़ाई के लिए सड़क से अदालत तक संघर्ष तेज करेगी। एसपी साहब के निष्पक्ष जांच के भरोसे के बाद अब गेंद पुलिस प्रशासन के पाले में है कि वह मौखिक और एकपक्षीय आरोपों के दलदल से बाहर निकलकर इस सनसनीखेज प्रकरण में सच की परतों को कितनी जल्दी बेनकाब करता है।

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