शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बड़ी पहल : कलेक्टर ने समाप्त किया शिक्षकों का संलग्नीकरण, मूल पदस्थापना पर लौटे 18 शिक्षक

मनेंद्रगढ़ – एमसीबी – जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगडे द्वारा बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। वर्ष 2025-26 में जिले के परीक्षा परिणामों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने तथा स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए पूर्व में किए गए संलग्नीकरण को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। आदेश के तहत विभिन्न कार्यालयों एवं अन्य कार्यों में संलग्न शिक्षकों, व्याख्याताओं, सहायक शिक्षकों एवं प्रधानपाठकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा गया है।
जारी आदेश के अनुसार पारसमणि, व्याख्याता, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनेंद्रगढ़, टी.विजय गोपाल राव, व्याख्याता, शासकीय कन्या उमावि मनेंद्रगढ़, मनीषा तिवारी, व्याख्याता, हाई स्कूल छिपछिपी, गणेश प्रसाद यादव, शिक्षक, शासकीय माध्यमिक शाला खोंगापानी, सूर्याेदय सिंह, शिक्षक, माध्यमिक शाला भौता, कलेश्वर पैकरा, शिक्षक, माध्यमिक शाला सेंधा, खुशबू दास, शिक्षक, प्राथमिक शाला कलमडाड़, रणधीर ठाकुर, व्यायाम शिक्षक, उच्च माध्यमिक विद्यालय देवाडांड, सुशील शर्मा, सहायक शिक्षक, प्राथमिक शाला ढुलकू, विरेंद्र पाण्डेय, शिक्षक, शासकीय माध्यमिक शाला नागपुर, जशवंत कुमार, व्याख्याता, शासकीय कन्या उमावि मनेंद्रगढ़, उमेश पाण्डेय, शिक्षक, माध्यमिक शाला हर्रई, अनिल पटेल, शिक्षक, माध्यमिक शाला पूजी, आदर्शनाथ तिवारी, प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला डोंगरिटोला, विजय पाण्डेय, शिक्षक, माध्यमिक शाला देवाडांड, सुजीत साहू, प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला लकरापारा, राजकुमार नामदेव, सहायक शिक्षक, विकासखंड साक्षरता (उल्लास) तथा विनोद पाण्डेय, व्याख्याता, हाईस्कूल पिपरिया को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा गया है।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जिले के विकासखंड मनेंद्रगढ़, खड़गवां एवं भरतपुर में शिक्षकों को शिक्षकीय कार्य के अतिरिक्त अन्य कार्यालयीन कार्यों में संलग्न नहीं रखा जाएगा। यह कदम विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यालयों में नियमित शिक्षण व्यवस्था संचालित हो सके, इस उद्देश्य से उठाया गया है।
जिले में इस निर्णय को शिक्षा व्यवस्था सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने भी प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण का लाभ मिलेगा।

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