डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
दो महीने तक धरना-प्रदर्शन और भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध, 45 गांवों के 1706 परिवारों के प्रभावित होने की संभावना
डिंडौरी। नर्मदा नदी पर प्रस्तावित राघवपुर-मरवारी बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक कदम उठाया है। परियोजना के कार्यस्थल ग्राम घुसियामाल और उससे लगे पांच किलोमीटर के क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अनुविभागीय दंडाधिकारी डिंडौरी रामबाबू देवांगन द्वारा जारी यह आदेश 11 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होकर दो महीने तक लागू रहेगा।
प्रशासन के आदेश के अनुसार, निर्धारित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन, रैली, जुलूस, नारेबाजी, भूख हड़ताल, चक्काजाम और घेराव जैसी गतिविधियों के लिए भीड़ एकत्र करने पर प्रतिबंध रहेगा। पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का अनधिकृत रूप से एकत्र होना भी प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा अस्त्र-शस्त्र, आग्नेयास्त्र, विस्फोटक पदार्थ, लाठी, रॉड और धारदार हथियार लेकर क्षेत्र में प्रवेश करने पर रोक लगाई गई है। हालांकि, आदेश में निर्धारित अपवादों के तहत सुरक्षा कर्मियों और धार्मिक प्रयोजन से आवश्यक साधनों को छूट दी गई है।
बैनर-पोस्टर और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर भी प्रतिबंध
जारी आदेश में ऐसी गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है, जिनसे क्षेत्र में भय, तनाव या अशांति की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका हो। सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सामाजिक-सांस्कृतिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तथा लोक शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। धरना-प्रदर्शन के दौरान नकाब पहनने, काले झंडे प्रदर्शित करने और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने पर भी रोक लगाई गई है।
हालांकि, शासकीय कार्यों, आपातकालीन सेवाओं और विधिसम्मत शासकीय बैठकों को आदेश से छूट दी गई है। प्रशासन ने परिस्थितियों की संवेदनशीलता को देखते हुए आदेश एकपक्षीय रूप से जारी किया है। आदेश से प्रभावित व्यक्ति भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163(5) के तहत अनुविभागीय दंडाधिकारी के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
1144 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना, 45 गांव होंगे प्रभावित
राघवपुर-मरवारी बहुउद्देशीय परियोजना नर्मदा नदी पर प्रस्तावित है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन ने 6 अगस्त 2021 को 1,144.27 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। परियोजना का उद्देश्य सिंचाई, विद्युत उत्पादन और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है।
परियोजना के पूर्ण होने पर 25 मेगावाट विद्युत उत्पादन और 17,587 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 726.87 मिलियन घन मीटर तथा उपयोगी जल भंडारण क्षमता 564.47 मिलियन घन मीटर बताई गई है। उपयोगी भंडारण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा पेयजल के लिए निर्धारित किए जाने का प्रावधान है।
1706 परिवारों के विस्थापन की संभावना, मुआवजा वितरण जारी
परियोजना के डूब क्षेत्र में डिंडौरी और शाहपुरा तहसीलों के कुल 45 गांव प्रभावित होने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे लगभग 1,706 परिवारों के विस्थापित होने की स्थिति बन सकती है।
भू-अर्जन प्रक्रिया के तहत प्रभावित गांवों की निजी भूमि के संबंध में धारा-11 और धारा-19 के प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 25 गांवों के प्रस्ताव धारा-23 के तहत अवार्ड के लिए प्रस्तुत किए जा चुके हैं। मुआवजा भुगतान के लिए कलेक्टर के पीडी खाते में 294 करोड़ रुपये जमा कराए जाने की जानकारी भी परियोजना संबंधी विवरण में दी गई है।
प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, अब तक पांच गांवों में लगभग 30 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए डिंडौरी तहसील के ग्राम मुड़ियाकलां में 27.390 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है।
प्रभावितों की मांगों के बीच प्रशासन का प्रतिबंधात्मक कदम
परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बैठकों तथा ज्ञापन सौंपने का सिलसिला भी जारी रहा है। जानकारी के अनुसार, एक अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रभावित किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद दो अक्टूबर को ग्रामीणों ने गांव में बैठक कर परियोजना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, जबकि पांच अक्टूबर को ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर पुनर्वास, विस्थापन और मुआवजे से संबंधित मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था।
ऐसे में परियोजना स्थल के पांच किलोमीटर के दायरे में धारा 163 लागू किए जाने से क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रशासनिक नियंत्रण रहेगा। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। परियोजना को लेकर आगे की स्थिति प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावितों की मांगों के निराकरण पर निर्भर करेगी।
