डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी। ग्राम पंचायत नुनखान में पंचायत भवन से टिकरी टोला तक बनाई गई सीसी सड़क की हालत ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवसंरचना योजना (राज्य वित्त आयोग) के तहत करीब 10 लाख रुपये की लागत से लगभग 300 मीटर लंबी सड़क का निर्माण करीब सात महीने पहले कराया गया था। लेकिन इतनी कम अवधि में ही सड़क की सतह उखड़ने लगी है और जगह-जगह गिट्टी बाहर निकलने लगी है। सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर ग्रामीणों के बीच निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले को और चर्चा में ला दिया है सरपंच के कथित बयान ने, जिसमें विधायक को 20 प्रतिशत देने की बात कही गई है। हालांकि, यह राशि किस मद में और किस संदर्भ में देने की बात कही गई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में सड़क निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता के साथ-साथ कथित बयान की निष्पक्ष जांच की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है।
सात महीने में ही उखड़ने लगी सड़क की परत
ग्रामीण क्षेत्रों में सीसी सड़कें इसलिए बनाई जाती हैं, ताकि लोगों को लंबे समय तक आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके। लेकिन नुनखान पंचायत में सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सतह खराब होने और गिट्टी निकलने की स्थिति सामने आने से निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क का इतनी जल्दी खराब होना सामान्य स्थिति नहीं माना जा सकता। हालांकि, इसके वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
सवाल यह है कि निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया गया था या नहीं? सड़क की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की जांच किस स्तर पर हुई? निर्माण पूरा होने के बाद कार्य का निरीक्षण किसने किया और गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही भुगतान किया गया या नहीं? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और स्थल निरीक्षण से ही मिल सकेगा।
सरपंच के कथित बयान से बढ़ी चर्चा, आखिर 20 प्रतिशत किस बात का?
इस मामले में सरपंच के कथित बयान ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरपंच ने कहा कि विधायक को 20 प्रतिशत देना होता है। यदि यह कथन निर्माण कार्य की राशि में से कथित कमीशन या किसी अन्य भुगतान के संदर्भ में दिया गया है, तो इसकी वास्तविकता स्पष्ट होना जरूरी है।
आखिर यह 20 प्रतिशत किस मद में दिए जाने की बात कही गई? क्या यह किसी निर्धारित प्रक्रिया से जुड़ा भुगतान है या कथित कमीशन की ओर इशारा किया गया है? इन सवालों का जवाब सरपंच के पूरे बयान, उसके संदर्भ और संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल केवल कथित बयान के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को राशि दिए जाने या भ्रष्टाचार होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संबंधित पक्षों का स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जांच इस मामले में जरूरी है।
सरपंच-सचिव के साथ तकनीकी अमले की भूमिका भी जांच के दायरे में
पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों में सरपंच और सचिव की प्रशासनिक एवं वित्तीय भूमिका के साथ संबंधित तकनीकी अमले की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नुनखान की सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निर्माण की निगरानी, तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार काम कराया गया था या नहीं, माप पुस्तिका में कितने कार्य का उल्लेख है, निर्माण पूर्णता प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया गया और भुगतान से पहले गुणवत्ता का परीक्षण हुआ था या नहीं। सड़क की मोटाई और कंक्रीट की गुणवत्ता का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण भी कराया जाना चाहिए, ताकि खराबी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
जांच हुई तो सामने आएगी निर्माण की हकीकत
ग्राम पंचायत नुनखान की सीसी सड़क का मामला केवल सड़क की खराब होती सतह तक सीमित नहीं है। यह सरकारी राशि से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ा है। यदि तकनीकी जांच में निर्माण संबंधी खामियां या वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, कथित 20 प्रतिशत वाले बयान की भी निष्पक्षता से पड़ताल होनी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच कराता है या नहीं। सात महीने में सड़क की परतें क्यों उखड़ने लगीं और 20 प्रतिशत वाले कथित बयान की सच्चाई क्या है—इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

