डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी/मेहंदवानी। जनपद पंचायत मेहंदवानी एक बार फिर ग्राम पंचायतों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ ग्राम पंचायतों में ठेकेदार, सरपंच, सचिव एवं उपयंत्री की कथित मिलीभगत से फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान, मास्टर रोल में हेराफेरी तथा नियमों के विपरीत वित्तीय लेनदेन किए गए हैं। लगातार शिकायतों और समाचारों के प्रकाशन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनपद क्षेत्र की कई पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जांच और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और लोगों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुछ पंचायतों में एक ही मटेरियल सप्लायर के नाम पर संदिग्ध बिल प्रस्तुत कर भुगतान किया गया है। वहीं, मास्टर रोल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज कर मजदूरी का भुगतान दर्शाया गया, जिनका संबंधित पंचायतों में कार्य करने से कोई संबंध नहीं था। आरोप यह भी है कि ठेकेदार से जुड़े मजदूरों तथा उसके ड्राइवर के नाम पर भी अलग-अलग ग्राम पंचायतों से भुगतान किया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत डोकरघाट, दुलहरी, फुलवाही, सारसडोली सहित अन्य पंचायतों में भी इस प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि भुगतान संबंधी अभिलेखों, बिलों, मास्टर रोल और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए तो कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि पंचायतों में होने वाले भुगतान एवं तकनीकी स्वीकृतियां प्रशासनिक निगरानी में होती हैं। इसके बावजूद यदि लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि कार्रवाई के अभाव में दोषियों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर डिंडौरी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित ग्राम पंचायतों के बिल, मास्टर रोल, भुगतान अभिलेख तथा निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
