सतना मध्य प्रदेश

 

सतना 02 नवम्बर 2026/मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्रदेश भर में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 का संचालन 8 जनवरी 2027 तक किया जा रहा है। सतना जिले में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान 6 नवम्बर को स्थगित करते हुए 13 नवम्बर को आयोजित किया जायेगा।

 

पराली जलाने पर 2500 से 15 हजार रुपये तक लगेगा जुर्माना

पराली जलाने की घटना प्रमाणित होने पर रामपुर बाघेलान में किसान पर 2500 रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित

सतना 02 नवम्बर 2026/कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस ने जिले के किसानों से अपील की है कि धान की फसल कटाई के बाद खेतों में पराली न जलाएं। पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता, कृषि उत्पादन एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके समुचित प्रबंधन के लिए किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम युक्त कंबाइन हार्वेस्टर, रीपर कंबाइंडर एवं बेलर जैसी कृषि मशीनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आशीष पाण्डेय द्वारा बताया गया कि एक टन धान के भूसे में लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटेशियम, 1.2 किलोग्राम सल्फर तथा 400 किलोग्राम कार्बन मौजूद होता है। पराली जलाने से ये महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 11 किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर, 58 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1400 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 199 किलोग्राम राख एवं 1.2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार पराली जलाना प्रतिबंधित है। कलेक्टर सतना जारी आदेश के अनुसार पराली जलाने की घटना प्रमाणित होने पर भूमि धारक किसानों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूल की जाएगी। इसके तहत 2 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक भूमि वाले किसानों पर 5000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15 हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई है।

इसी क्रम में जिले में पराली जलाने की एक घटना प्रमाणित होने पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रामपुर बाघेलान द्वारा संबंधित किसान पर 2500 रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है। इस दौरान फसल कटाई में उपयोग किए जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर अथवा बेलर का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इसके लिए जिला परिवहन अधिकारी, सहायक कृषि अभियांत्रिकी, कृषि विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सतत निगरानी की जा रही है। बिना स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर अथवा बेलर के कंबाइन हार्वेस्टर संचालित किए जाने पर संबंधित के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

 

प्रशांत त्रिपाठी सतना ब्यूरो

Leave A Reply

Exit mobile version