​बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।

शहर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। लिंगियाडीह स्थित ‘जी.टी. ईडन कोर्ट रेसिडेंशियल सोसायटी’ की बाउंड्री दीवार तोड़े जाने को लेकर सोसायटी के निवासियों और स्थानीय पार्षद के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहाँ सोसायटी ने इसे अवैध और मनमानी कार्रवाई बताते हुए प्रशासन से शिकायत की है, वहीं दूसरी तरफ पार्षद ने इसे मजबूरी में उठाया गया एक मानवीय कदम करार दिया है।

 

​सोसायटी का आरोप: बिना अनुमति तोड़ी दीवार, सुरक्षा खतरे में

 

​’जी.टी. ईडन कोर्ट रेसिडेंशियल सहकारी समिति मर्यादित’ के पदाधिकारियों और निवासियों ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को एक लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत के अनुसार, 17 जुलाई की सुबह लगभग 9:30 बजे, भारी बारिश के दौरान स्थानीय पार्षद श्री जय वाधवानी ने 4-5 अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर बिना किसी पूर्व सूचना या सोसायटी की अनुमति के बाउंड्री दीवार को तोड़ दिया।

​सोसायटी का कहना है कि इस तोड़फोड़ के कारण परिसर की सुरक्षा पूरी तरह भंग हो गई है। जलभराव के चलते सोसायटी का इलेक्ट्रिकल रूम, लिफ्ट, गैस बैंक और आर.ओ. फिल्टर प्लांट पानी में डूब गए हैं, जिससे मानव जीवन के लिए सीधा खतरा पैदा हो गया है। निवासियों ने इस मामले में पार्षद और उनके साथियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इस पत्र की प्रतियां एसपी बिलासपुर, जोन कमिश्नर और सरकंडा थाना प्रभारी को भी भेजी गई हैं।

 

​पार्षद का पक्ष: ‘दीवार तोड़ना गलती नहीं, लोगों की जान बचाना था मकसद’

 

​दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए पार्षद जय वाधवानी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्षद का कहना है कि उन्होंने जो भी किया, वह जनहित और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया।

​पार्षद ने अपनी सफाई में कहा, “भारी बारिश के कारण समिति के आसपास के क्षेत्र में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी। लोगों के घरों में पानी घुस चुका था। हालात इतने बदतर थे कि छोटे-छोटे बच्चे और परिवार के लोग छतों पर रहने को मजबूर हो गए थे। ऐसी आपातकालीन स्थिति में पानी की त्वरित निकासी करना बेहद जरूरी था। मैंने लोगों के घरों को डूबने से बचाने के लिए पानी निकालने के उद्देश्य से वह दीवार तोड़ी है। यह एक नेक काम था, कोई गलती नहीं। मेरा मकसद किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि जलभराव में फंसे लोगों को राहत देना था।”

 

​असमंजस में प्रशासन

 

​इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। एक तरफ जहाँ सोसायटी के लोग अपनी करोड़ों की संपत्ति और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को हुए नुकसान तथा सुरक्षा में सेंध से नाराज हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रभावित लोग पार्षद के इस कदम को सही ठहरा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन और पुलिस इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है।

रिपोर्ट: राजा जंक्यानी

ब्यूरो चीफ (क्राइम)

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