बिलासपुर की 14 वर्षीय बेटी ने निभाया पिता का अंतिम फ़र्ज़, समाज में नई सोच का संदेश
बिलासपुर के कछवाहा समाज में एक 14 वर्षीय बालिका ने अपने पिता के असमय निधन के बाद स्वयं उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देकर न केवल पिता का अंतिम संस्कार किया, बल्कि पूरे समाज के सामने साहस, संवेदना और जिम्मेदारी का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत किया। यह घटना न केवल कच्छवाहा समाज बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है ¹।
बिलासपुर के तेलीपारा में रहने वाले पिंटू कछवाहा बीते कुछ समय से बीमार थे। मंगलवार की रात उनकी तबियत ज्यादा खराब होने पर परिवार के लोग उन्हें रायपुर ले गए, लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी पिंटू को नहीं बचाया जा सका। रात करीब तीन बजे पिन्टू कछवाहा के शव को तेलीपारा उनके निवास पर लाया गया। परिवार में पिन्टू की पत्नी के अलावा 14 साल की बेटी कृपा है। चूंकि मृतक का बेटा नहीं है, ऐसे में रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने बेटी से अंतिम संस्कार कराये जाने का मन बनाया।
बेटी कृपा ने पिता की अंतिम रस्मो को पूरा करते हुए मुक्तिधाम पहुंची और पिता का अंतिम संस्कार किया। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने इस कार्य को नए युग की सोच, लैंगिक समानता का संदेश और बेटियों की क्षमता का सम्मान बताया।
क्या आप जानना चाहते हैं कि इस घटना के बाद समाज में क्या बदलाव आया है? या फिर आप इस बेटी की साहस और जिम्मेदारी के बारे में और जानना चाहते हैं?
ब्यूरोचीफ शंकर अघिजा
क्राइम रिपोर्टर राजा जनक्यानी
