‘नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर’ और विज़न 2026’ के लिए प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री को सौंपा गया विस्तृत प्रस्ताव
नर्मदा-विंध्य कॉरिडोर: विकास, पर्यटन और व्यापार की नई उम्मीद
जनजातीय अंचल की वर्षों पुरानी रेल मांग फिर हुई मजबूत
मंडला से नई रेल क्रांति की पहल
मंडला। मध्य भारत के जनजातीय अंचलों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Independent Rail Activist Nitin Solanki ने प्रधानमंत्री जी एवं केंद्रीय रेल मंत्री जी को एक विस्तृत विकास प्रस्ताव प्रेषित किया है।
इस प्रस्ताव के अंतर्गत ‘विज़न 2026’ के माध्यम से मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आधुनिक रेल अधोसंरचना विकसित करने की मांग की गई है।
1.नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर: विकास की नई धुरी
प्रस्तावित नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडौरी–मंडला–घंसौर -गोटेगांव रेल लाइन के रूप में विकसित किए जाने का सुझाव दिया गया है।
यह परियोजना:
* माँ Narmada River Origin के उद्गम स्थल Amarkantak तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित करेगी।
* विंध्य एवं सतपुड़ा क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल मानचित्र पर जोड़ेगी।
* जनजातीय अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को नई गति देगी।
2.मंडला फोर्ट स्टेशन को हब टर्मिनल बनाने की मांग
यदि भविष्य में मंडला को Mungeli एवं Bilaspur से रेल मार्ग द्वारा जोड़ा जाता है, तो यह South East Central Railway के लिए एक वैकल्पिक एवं छोटा माल परिवहन मार्ग बन सकता है, जिससे:
•ईंधन की बचत होगी
•माल ढुलाई समय कम होगा
•परिचालन लागत में कमी आएगी
3. ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया आधार
विशेष रूप से:
* ‘श्री अन्न’ (कोदो-कुटकी)
* गोंडी चित्रकला
* वन उत्पाद एवं हस्तशिल्प
को नए व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे।
4.पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विश्व प्रसिद्ध Kanha Tiger Reserve तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी विकसित होने से पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
इससे:
* होटल एवं परिवहन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
•स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे
•क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
प्रशासनिक स्थिति
इस संबंध में जनहित की याचिका पर पंजीकरण संख्या MORLY/E/2026/0019457 के माध्यम से शिकायत एवं सुझाव दर्ज किए गए हैं।
वर्तमान में यह मामला Railway Board के संज्ञान में है तथा West Central Railway, जबलपुर के मुख्य परिचालन प्रबंधक (PCOM) कार्यालय में प्रक्रियाधीन बताया गया है।
Independent रेल एक्टिविस्ट का दृष्टिकोन
Nitin Solanki का कहना है:
“आदिवासी अंचल में यह परियोजनाएं केवल नई रेल पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय बहुल क्षेत्र की आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धमनियों को जोड़ने का एक व्यापक प्रयास हैं।”भारत ‘अमृत काल’ में प्रवेश कर चुका है और प्रधानमंत्री जी यशस्वी नेतृत्व में देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का अभूतपूर्व कायाकल्प हो रहा है। इसी क्रम में, मैं महाकौशल (म.प्र.) और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के उन वनांचलों की आवाज़ आप तक पहुँचाना चाहता हूँ, जो आज भी सुदृढ़ रेल कनेक्टिविटी की बाट जोह रहे हैं।

