डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी (मध्य प्रदेश)। जिले में सरकारी धान के भंडारण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। निगवानी स्थित वेयर हाउस में खुले स्टेक में रखी हजारों क्विंटल धान बारिश के पानी की चपेट में आकर खराब हो गई। कई बोरियां सड़ चुकी हैं, जबकि कुछ बोरियों में धान अंकुरित होकर पौधे का रूप ले चुकी है। सरकारी अनाज की बर्बादी के सामने आने के बाद भंडारण व्यवस्था और जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
15 हजार बोरियां खराब होने का दावा
जानकारी के अनुसार निगवानी वेयर हाउस परिसर में करीब 75 ओपन स्टेक बनाए गए हैं। प्रत्येक स्टेक में लगभग 300 बोरियां धान रखी गई हैं। मजदूरों के अनुसार बारिश के कारण बड़ी संख्या में बोरियां भीगकर खराब हो चुकी हैं। करीब 15 हजार बोरियों के खराब होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वास्तविक रूप से कितनी धान खराब हुई है, इसका आधिकारिक आकलन जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
खराब धान की छंटाई में जुटे मजदूर
वेयर हाउस परिसर में इन दिनों मजदूर खराब और सही धान को अलग करने में जुटे हैं। जो धान कुछ हद तक उपयोग योग्य है, उसे अलग कर मिलों तक भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। वहीं सड़ी हुई बोरियों और उनमें अंकुरित हो चुकी धान की स्थिति सरकारी अनाज के रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
बारिश के मौसम में खुले में क्यों रखा गया अनाज?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश का मौसम पहले से निर्धारित था, तो इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी धान को खुले स्टेक में रखने के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए। क्या सभी स्टेक को पर्याप्त तिरपाल से ढका गया था? क्या जल निकासी की समुचित व्यवस्था थी? यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते तो क्या सरकारी अनाज को खराब होने से बचाया जा सकता था, यह जांच का विषय है।
लाखों रुपये के नुकसान की आशंका
हजारों बोरियों में रखी धान खराब होने से शासन को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि नुकसान की वास्तविक राशि धान की मात्रा और गुणवत्ता के आधिकारिक आकलन के बाद ही स्पष्ट होगी। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं कि मामले में खराब हुई धान की वास्तविक मात्रा कितनी है, इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है और सरकारी अनाज को बारिश से बचाने के लिए किए गए इंतजामों की स्थिति क्या थी।
सरकारी धान की इस कथित बर्बादी ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि करोड़ों रुपये मूल्य के खाद्यान्न के भंडारण में यदि समय रहते जरूरी सावधानी नहीं बरती जाए तो इसकी कीमत आखिरकार सरकारी खजाने को ही क्यों चुकानी पड़े?
