पुलिस जागती है, तब शहर चैन से सोता है

रायपुर। जब शहर अपने घरों में चैन की नींद सो रहा होता है, तब रायपुर की सड़कों पर पुलिसकर्मी जाग रहे होते हैं। उनकी ड्यूटी सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही की एक अहम कड़ी है।

रात के समय पचपेड़ी नाका चौक पर ट्रैफिक का दबाव कम होने के बजाय कई बार और चुनौतीपूर्ण हो जाता है। एक ओर मॉल, दूसरी ओर बड़े अस्पताल और इसी मार्ग से जगदलपुर हाईवे की ओर जाने वाला यातायात। ऐसे में भारी वाहनों और दोपहिया-चारपहिया वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच यातायात व्यवस्था संभालना ट्रैफिक पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है।

इन तस्वीरों में देर रात भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी सड़क पर पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी निभाते नजर आ रहे हैं। चारों तरफ वाहनों की भीड़, तेज हेडलाइट, लगातार बजते हॉर्न और जाम के बीच पुलिसकर्मी यातायात को नियंत्रित करने और वाहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

लेकिन पुलिस की कोशिशों के बीच एक बड़ी चुनौती उन वाहन चालकों की भी है, जो यातायात नियमों को अपनी सुविधा के हिसाब से नजरअंदाज कर देते हैं। तस्वीर में एक ऑटो ऐसा भी नजर आ रहा है, जिसमें पीछे सामान रखने के लिए निर्धारित हिस्से में भी यात्रियों को बैठाया गया है। नियमों में इस तरह सवारी बैठाने की अनुमति नहीं है, बावजूद इसके ऐसे मामले सड़क पर दिखाई देते हैं।

सवाल यह भी है कि नियम तोड़ने वालों पर जिम्मेदार कौन है? पुलिस अपनी कार्रवाई और ड्यूटी पूरी करती है, लेकिन यातायात व्यवस्था केवल पुलिस के भरोसे नहीं चल सकती। जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और सड़क पर नियमों का पालन करना होगा।

गलत दिशा में वाहन चलाना, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना, ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करना या जाम के बीच जल्दबाजी में नियम तोड़ना केवल पुलिस के लिए चुनौती नहीं बढ़ाता, बल्कि खुद वाहन चालक और दूसरे राहगीरों की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है।

पचपेड़ी नाका जैसे व्यस्त चौराहे पर पुलिसकर्मी घंटों सड़क पर खड़े रहते हैं। धूल, धुएं, वाहनों के शोर और तेज रोशनी के बीच लगातार यातायात संभालना आसान काम नहीं है। कई बार आम लोगों को पुलिस की सख्ती दिखाई देती है, लेकिन उस सख्ती के पीछे शहर को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी और उनकी लगातार मेहनत नजर नहीं आती।

यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उसके साथ नागरिकों का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। पुलिस जागती रहे और जनता नियमों का पालन करे, तभी शहर चैन से सो भी सकेगा और सड़कों पर सुरक्षित सफर भी कर सकेगा।

क्योंकि जब हम अपने घरों में चैन से सो रहे होते हैं, तब कोई पुलिसकर्मी सड़क पर जागकर अपनी ड्यूटी निभा रहा होता है। शहर की इस चैन भरी नींद के पीछे सड़कों पर जागती पुलिस की मेहनत भी शामिल है।

रिपोर्टर: मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़

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