दैनिक भास्कर के मालिक कैलाश अग्रवाल और न्यूज एडिटर पर झूठी खबरें छापकर ब्लैकमेलिंग का आरोप; अपर कलेक्टर से शिकायत, रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग
जबलपुर के कारोबारी विनय दुबे ने अपर कलेक्टर के पास दैनिक भास्कर के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में दैनिक भास्कर के मालिक कैलाश अग्रवाल, पूर्व न्यूज एडिटर गिरीश पांडेय और दैनिक भास्कर प्रेस को पक्षकार बनाया गया है।
कारोबारी का आरोप है कि पुरानी रंजिश और दीवानी मामले के चलते उन पर दबाव बनाने के लिए लगातार भ्रामक और मानहानि करने वाली खबरें प्रकाशित की जा रही हैं।
पीड़ित ने बिना उचित जांच के खबरें छापने का आरोप लगाते हुए अखबार का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और मामले की जांच की मांग की है।
विस्तृत विवरण:
अपर कलेक्टर के पास पहुंचा मामला
जबलपुर के प्रतिष्ठित व्यवसायी विनय दुबे ने जबलपुर न्यायालय अपर कलेक्टर प्रथम (नजूल) श्री अभिषेक के समक्ष एक औपचारिक आवेदन पेश किया है (मामला क्रमांक: 0006/ब-121/2026-27)। यह आवेदन ‘अन्य: आवेदन पत्र अंतर्गत प्रेस एवं आवधिक पंजीकरण अधिनियम 2023 की धारा 6 सी’ के तहत समाचार पत्र का पंजीयन निरस्त करने हेतु लगाया गया है। इस शिकायत में दैनिक भास्कर के मालिक कैलाश अग्रवाल, न्यूज एडिटर गिरीश पांडेय और दैनिक भास्कर प्रेस को मुख्य पक्षकार बनाया गया है।
विवाद की मुख्य वजह: व्यावसायिक दुश्मनी
आवेदन में कारोबारी विनय दुबे ने खुलासा किया है कि दैनिक भास्कर के पूर्व न्यूज एडिटर गिरीश पांडेय पहले उनके साथ ‘एमएसकेवी डेवलपर्स’ (MSKV Developers) में भागीदार (Partner) थे। बाद में दोनों के बीच आपसी विवाद हो गया, जिसके बाद गिरीश पांडेय को फर्म से अलग कर दिया गया था। विनय दुबे का आरोप है कि इसी पुरानी दुश्मनी और रंजिश के चलते गिरीश पांडेय उनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर लगातार गलत और भ्रामक खबरें प्रकाशित करवा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों के बीच एक दीवानी मामला (Civil Case) भी कोर्ट में लंबित है, जिसके कारण उन पर दबाव बनाने के लिए इस मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
बिना प्रमाण ‘ट्रस्ट’ से नाम जोड़ने का आरोप
दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक खबर का हवाला देते हुए आवेदक ने बताया कि अखबार ने “भगवान बाल मुकुंद जी महाराज ट्रस्ट” की बेशकीमती जमीन पर अवैध प्लॉटिंग से जुड़ी एक रिपोर्ट छापी थी, जिसमें विनय दुबे का नाम जबरन घसीटा गया। विनय दुबे का स्पष्ट कहना है कि उनका इस ट्रस्ट से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। अखबार प्रबंधन ने बिना किसी ठोस दस्तावेज, बिना किसी विभागीय पुष्टि और बिना उचित जांच (Verification) के यह खबर प्रकाशित की, जो पत्रकारिता के बुनियादी नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
लीगल नोटिस के बाद भी जारी रहा खबरों का प्रकाशन
आवेदक का दावा है कि भ्रामक खबर सामने आने के बाद उन्होंने तुरंत अखबार प्रबंधन को एक कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बावजूद, दुर्भावनापूर्वक 24 मई 2026 को उनके खिलाफ फिर से एक और झूठी खबर छापी गई। हद तो तब हो गई जब इसके बाद 3 जून 2026 को भी इसी तरह का एक और मनगढ़ंत समाचार प्रकाशित कर दिया गया।
छवि को भारी नुकसान और मानसिक प्रताड़ना
विनय दुबे ने बताया कि इन खबरों को न केवल अखबार में छापा गया बल्कि इन्हें व्हाट्सएप (WhatsApp) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी तेजी से फैलाया गया। इसके बाद समाज और व्यापारिक हलकों से कई लोगों ने उनसे संपर्क किया, जिससे उनकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को गहरा धक्का लगा है। इस लगातार हो रही चरित्र-हत्या के कारण उन्हें गंभीर मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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