बिलासपुर /साइबर अपराधियों द्वारा एक वरिष्ठ नागरिक महिला को व्हाट्सएप मैसेज एवं वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क कर स्वयं को जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर भयभीत किया गया। आरोपियों ने महिला को यह कहकर डराया कि उनका नाम आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ है तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ठगों द्वारा पीड़िता को लगातार मानसिक दबाव एवं भय में रखकर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” किया गया तथा गिरफ्तारी एवं कानूनी कार्यवाही का डर दिखाकर विभिन्न बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये जमा करा लिये गए।
प्रार्थिया की रिपोर्ट पर थाना रेंज साइबर बिलासपुर में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 318(4), 308(6), 3(5) बीएनएस एवं 66C, 66D आईटी एक्ट के तहत विवेचना प्रारंभ की गई।
तकनीकी जांच एवं बैंक खातों के विश्लेषण के दौरान यह पाया गया कि आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते में साइबर ठगी की कुल 54 लाख 40 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री राम गोपाल गर्ग, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह तथा पर्यवेक्षण अधिकारी नगर पुलिस अधीक्षक सिटी कोतवाली श्री गगन कुमार के निर्देशन में निरीक्षक श्री कामिल हक के नेतृत्व में रेंज साइबर थाना की टीम गठित कर महाराष्ट्र रवाना किया गया।
साइबर पुलिस टीम द्वारा आरोपी नेमतउल्लाह मंसूरी को उसके निवास स्थान गांधी वार्ड, वरठी जिला भंडारा (महाराष्ट्र) से अभिरक्षा में लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने 2 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करने के लालच में अपना बैंक खाता अन्य साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था। उक्त खाते का उपयोग शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन फ्रॉड एवं डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नेपाल के काठमांडू जाकर अपना बैंक खाता अन्य आरोपियों को उपलब्ध कराता था। आरोपी का पिता अब्दुल कयूम अंसारी भी इस अवैध गतिविधि में संलिप्त पाया गया, जो कमीशन प्राप्त करने हेतु मुख्य आरोपियों से लगातार मोबाइल के माध्यम से संपर्क में था।
प्रकरण में अन्य संलिप्त आरोपियों एवं पूरे साइबर नेटवर्क की तलाश तकनीकी माध्यमों से जारी है।
ब्यूरो चीफ शंकर अघिजा
क्राइम रिपोर्टर राजा जनक्यानी

