डिंडौरी मध्यप्रदेश 

रिपोर्ट अखिलेश झारिया 

केंद्र से मिली मंजूरी, संक्रमण रोकने के लिए हटाए जाएंगे प्रभावित पेड़; 19 लाख बीटल नष्ट करने के बाद भी नहीं थमा प्रकोप

 

डिंडौरी। जिले के घने साल जंगलों पर बोरर बीटल का गंभीर संकट मंडरा रहा है। साल के पेड़ों को अंदर से खोखला कर नुकसान पहुंचाने वाले इस कीट का संक्रमण हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैल चुका है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच के दौरान 1 लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए अब इन प्रभावित पेड़ों को बड़े पैमाने पर हटाने की तैयारी की जा रही है।

 

राज्य सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग के लिए प्रभावित क्षेत्रों में कटाई और सफाई अभियान का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि अक्टूबर तक संक्रमित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

 

करीब 30000 हेक्टेयर जंगल तक पहुंचा संक्रमण

 

जानकारी के मुताबिक डिंडौरी जिले में बोरर बीटल का संक्रमण अब 30 हजार 344 हेक्टेयर वन क्षेत्र तक फैल चुका है। सर्वे और जांच के दौरान 1,46,784 संक्रमित साल के पेड़ों को चिह्नित किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में साल के पेड़ों का प्रभावित होना जिले की वन संपदा और पारिस्थितिकी के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

 

बोरर बीटल पेड़ों के तने के भीतर पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में वन विभाग के सामने संक्रमित पेड़ों को समय रहते हटाकर स्वस्थ पेड़ों तक संक्रमण पहुंचने से रोकना बड़ी चुनौती है।

 

19 लाख बीटल खत्म किए, फिर भी नहीं थमा संक्रमण

 

बोरर के प्रकोप पर नियंत्रण के लिए पहले स्थानीय स्तर पर बड़े प्रयास किए गए। कीटों को एकत्र करने के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की गई, जिसके तहत आदिवासी ग्रामीणों ने करीब 19 लाख साल बोरर बीटल एकत्र किए। इसके बावजूद जंगलों में संक्रमण का दायरा बढ़ता गया और स्थिति बड़े पैमाने पर संक्रमित पेड़ों को हटाने तक पहुंच गई।

 

वैज्ञानिक और पारिस्थितिक आधार पर मांगी गई थी रिपोर्ट

 

इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने का मामला सीधे वन और पर्यावरण से जुड़ा होने के कारण केंद्र स्तर पर प्रस्ताव का परीक्षण किया गया। प्रस्तावित कटाई के साथ भविष्य में किए जाने वाले वृक्षारोपण को लेकर राज्य सरकार से वैज्ञानिक, तकनीकी और पारिस्थितिक औचित्य संबंधी विस्तृत जानकारी भी मांगी गई थी। इसके बाद संक्रमित पेड़ों को हटाने की मंजूरी मिलने की बात सामने आई है।

 

कटाई के साथ जंगल बचाने की भी बड़ी चुनौती

 

करीब डेढ़ लाख साल के पेड़ों को हटाया जाना अपने आप में बड़ा वन प्रबंधन अभियान होगा। ऐसे में केवल संक्रमित पेड़ों की कटाई ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रभावित वन क्षेत्र में पुनर्वनीकरण, नए पौधों की सुरक्षा और बोरर के दोबारा फैलाव को रोकने की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी।

 

डिंडौरी की पहचान उसके घने जंगलों और समृद्ध प्राकृतिक संपदा से है। ऐसे में 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोरर का संक्रमण वन विभाग के लिए चेतावनी भी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि संक्रमित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई किस तरह की जाती है और 1.46 लाख पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए किस स्तर पर पुनर्वनीकरण और संरक्षण योजना लागू की जाती है।

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