डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

37 बच्चे, 7 शिक्षक… फिर भी पढ़ाई बेहाल!

डिंडौरी / शहपुरा। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार निरीक्षण और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, लेकिन शहपुरा विकासखंड के एकीकृत शाला चरगांव में निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में महज 37 विद्यार्थी दर्ज हैं और उनके लिए 7 शिक्षक पदस्थ हैं। यानी औसतन करीब हर 5 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। इसके बावजूद बच्चों का बुनियादी शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर पाया गया।

सहायक संचालक शिक्षा एवं अतिरिक्त प्रभार बीईओ शहपुरा द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि को परखने पर कई चौंकाने वाली कमियां सामने आईं। कक्षा 6 के विद्यार्थी सामान्य पहाड़े तक नहीं सुना पाए। वहीं अंग्रेजी विषय में भी विद्यार्थियों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली और बच्चे सामान्य अंग्रेजी शब्दों को लिखने में असमर्थ पाए गए।

दो माह से अधिक बीते, कई विषयों में एक-दो पाठ ही

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कुछ विषयों में विद्यार्थियों को अब तक केवल एक पाठ, जबकि कुछ विषयों में अधिकतम दो पाठ ही पढ़ाए गए हैं। इससे विद्यालय में नियमित कक्षाओं और प्रभावी शिक्षण कार्य के संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कक्षा 1 में निरीक्षण के दौरान केवल अंग्रेजी विषय की कक्षा संचालित होना पाया गया। वहीं गणित और अंग्रेजी जैसे बुनियादी एवं महत्वपूर्ण विषयों में भी अपेक्षित शैक्षणिक प्रगति नजर नहीं आई।

पांच बच्चों पर एक शिक्षक, फिर भी परिणाम सवालों के घेरे में

चरगांव स्कूल की स्थिति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 37 बच्चों की पढ़ाई के लिए 7 शिक्षक पदस्थ हैं और औसतन करीब 5 बच्चों पर एक शिक्षक उपलब्ध है, तो फिर बच्चों का शैक्षणिक स्तर इतना कमजोर क्यों है?

आमतौर पर पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से विद्यार्थियों पर अधिक व्यक्तिगत ध्यान, नियमित कक्षाएं और बेहतर सीखने का वातावरण सुनिश्चित होने की उम्मीद रहती है। लेकिन निरीक्षण में बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक दक्षता कमजोर मिलने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिक्षकों की पर्याप्त संख्या का लाभ विद्यार्थियों की पढ़ाई में आखिर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है।

शिक्षकों को दिए गंभीरता से पढ़ाई कराने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति पर अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षकों एवं संस्था प्रमुख को शिक्षण कार्य में गंभीरता बरतने, सभी विषयों की नियमित कक्षाएं संचालित करने और विद्यार्थियों के बुनियादी शैक्षणिक कौशल में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्यालय में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त होना तभी सार्थक है, जब उसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके सीखने के स्तर पर दिखाई दे। आगामी निरीक्षणों में विद्यार्थियों की कक्षा-वार शैक्षणिक उपलब्धि और वास्तविक प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

अब देखना यह होगा कि निरीक्षण के बाद चरगांव स्कूल की शिक्षण व्यवस्था में कितना सुधार आता है और अगली समीक्षा में विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर इन सवालों का जवाब दे पाता है या नहीं।

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