डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
अमृत सरोवर, चेकडैम, मिनी परकुलेशन टैंक और सीसी सड़क सहित कई निर्माण कार्यों पर उठे सवाल; 21 कार्य दिवस में बिंदुवार जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश
शहपुरा, डिंडौरी। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरैया में विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायत पर जांच में देरी का मामला सामने आया है। शिकायत के बावजूद जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होने पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) शहपुरा ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को स्मरण पत्र जारी कर निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में 21 कार्य दिवस के भीतर स्पष्ट एवं बिंदुवार जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
ग्राम गुरैया निवासी सम्हर सिंह मसराम ने जनसुनवाई में आवेदन देकर पंचायत के पिछले और वर्तमान कार्यकाल में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। शिकायत में अमृत सरोवर, गेबियन स्ट्रक्चर, मिनी परकुलेशन टैंक, चेकडैम, तालाब निर्माण, सीसी सड़क और स्वागत द्वार सहित कई कार्यों में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने फर्जी बिल-बाउचर के माध्यम से शासकीय राशि आहरित किए जाने की आशंका जताते हुए निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
अमृत सरोवर से लेकर चेकडैम तक, निर्माण कार्यों पर सवाल
शिकायत में अमृत सरोवर निर्माण पर लगभग 42.15 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख करते हुए इसकी वास्तविक स्थिति, निर्माण गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच कराने की मांग की गई है। इसी तरह गेबियन स्ट्रक्चर पर करीब 4.80 लाख रुपये तथा अतिरिक्त 7.20 लाख रुपये की राशि के उल्लेख के साथ संबंधित स्वीकृति और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग उठाई गई है।
मिनी परकुलेशन टैंक निर्माण पर करीब 12.40 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख भी आवेदन में किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2019-20 में लगभग 19 लाख रुपये की लागत से कराए गए मिनी परकुलेशन टैंक सहित अन्य संरचनाओं को भी जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ निर्माण कार्यों की उपयोगिता और वास्तविक स्थिति पर सवाल हैं। ऐसे में मौके पर जाकर निर्माण की स्थिति का आकलन करने और स्वीकृत राशि का वास्तविक कार्यों से मिलान कराने की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
22 लाख के चेकडैम सहित कई कार्यों की जांच की मांग
आवेदन में एक चेकडैम निर्माण पर करीब 22 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि निर्माण में गेट नहीं लगाए जाने और अन्य तकनीकी कमियों के कारण अपेक्षित जल संग्रहण नहीं हो पा रहा है। शिकायतकर्ता ने चेकडैम की गुणवत्ता, तकनीकी मापदंडों और उपयोगिता की जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा दौरखा नाला क्षेत्र में चेकडैम निर्माण, पीपर टोला में तालाब जीर्णोद्धार, साठिया टोला में चेकडैम तथा नाला विस्तारीकरण जैसे कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत में इन सभी कार्यों का मौके पर सत्यापन कर स्वीकृत प्राक्कलन, वास्तविक निर्माण और भुगतान के बीच अंतर की पड़ताल करने की मांग की गई है।
सीसी सड़क और स्वागत द्वार भी जांच के दायरे में
ग्राम पंचायत में स्वागत द्वार निर्माण पर लगभग 4.80 लाख रुपये, समनपुरा में सीसी निर्माण पर करीब 3 लाख रुपये तथा साठिया टोला में सीसी निर्माण पर लगभग 1.60 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति, वास्तविक लागत और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने का अनुरोध किया है।
फर्जी बिल-बाउचर और भुगतान की भी पड़ताल की मांग
शिकायत में सप्लायर महिमा ट्रेडर्स के बिलों की जांच कराने के साथ पंचायत के निर्माण कार्यों से संबंधित बिल-बाउचर, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति, एस्टीमेट, मेजरमेंट बुक (एमबी), डीपीआर और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही पंचायत से जुड़े व्यक्तियों के खातों में शासकीय राशि के कथित लेन-देन और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच करने का भी अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्तियों की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच की मांग भी आवेदन में उठाई है। इन आरोपों के संबंध में अभी कोई जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
स्मरण पत्र के बाद जांच पर टिकी निगाहें
जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने में देरी के बीच एसडीएम द्वारा जारी स्मरण पत्र से मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय को निर्धारित 21 कार्य दिवस में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है। जांच के दौरान निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन, स्वीकृत राशि और वास्तविक व्यय का मिलान तथा संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल अहम होगी।
अब सवाल यह है कि जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी होकर प्रतिवेदन प्रस्तुत होता है या नहीं और शिकायत में उठाए गए सवालों पर प्रशासन की जांच क्या निष्कर्ष सामने लाती है। फिलहाल निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप जांच के अधीन हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच प्रतिवेदन सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
