पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार?
कटनी। जिले में अवैध शराब की पैकारी का कारोबार लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। गांवों से लेकर कस्बों तक अवैध रूप से शराब की बिक्री को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर शासन-प्रशासन नशामुक्त समाज बनाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने की शिकायतें व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इस अवैध कारोबार का असर अब युवा पीढ़ी पर भी दिखाई देने की बात सामने आ रही है। कम उम्र के युवाओं में शराब सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति परिवारों और समाज के लिए चिंता का विषय बन रही है। जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें, रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में नशे की ओर बढ़ता रुझान सामाजिक चिंता को गहरा कर रहा है।
✍️*आखिर कहां गायब हो रही है जिम्मेदार विभागों की निगरानी?*
सवाल यह है कि यदि जिले में अवैध शराब की बिक्री हो रही है तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां है? पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल समय-समय पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो संबंधित क्षेत्रों में नियमित जांच, संदिग्ध ठिकानों की निगरानी और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या विभागों को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या फिर निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है। इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए ।
✍️ युवा पीढ़ी का भविष्य दाव पर परिवारों की बढ़ रही चिंता
अवैध शराब की आसान उपलब्धता का सबसे बड़ा खामियाजा युवा पीढ़ी को भुगतना पड़ सकता है। नशे की आदत न केवल युवा के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित करती है ,बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में अवैध शराब की पैकारी को महज कानून व्यवस्था का मामला मानकर नजर अंदाज करना उचित नहीं होगा।यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जोड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है।
✍️ कागजी कार्रवाई नहीं, धरातल पर चाहिए ठोस परिणाम
अब जरूरत केवल औपचारिक छापेमारी और कार्रवाई की खबरों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार की जड़ तक पहुंचने की है। शराब कहां से आ रही है, इसकी आपूर्ति कौन कर रहा है और किन माध्यमों से गांवों एवं कस्बों तक पहुंचाई जा रही है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ।
जिला प्रशासन पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायतों की जांच करानी चाहिए ।यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
✍️ सबसे बड़ा सवाल : आखिर कब थमेगा अवैध शराब का कारोबार?
कटनी जिले की जनता यह जानना चाहती है की अवैध शराब की पैकारी पर प्रभावी रोक कब लगेगी? युवाओं को नशे से बचने के लिए जिम्मेदार विभाग धरातल पर क्या कदम उठा रहे हैं? आखिर कब तक अवैध शराब के कारोबार की शिकायतों के बीच जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में रहेगी ।
अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल दावों और आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करें , ताकि अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लग सके, और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त मैं जाने से बचाया जा सके
✍️*पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से संभाग ब्यूरो पारस गुप्ता की रिपोर्ट*
