ईसाई धर्म अपनाकर भी आदिवासी कोटे से मौज उड़ाने वाला दूसरा शातिर भी बेनकाब

शहडोल। आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठे भू-माफियाओं और जालसाजों के एक ऐसे सनसनीखेज सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की नाक के नीचे जालसाजी का खौफनाक ताना-बाना बुना। सामान्य और पिछड़ा वर्ग के रसूखदारों ने कागजों में रातों-रात अपनी जाति बदलकर आदिवासियों के आरक्षण और हक पर ऐसा डाका डाला कि सुनने वालों के होश उड़ गए। मामला सीधे कलेक्टर के चौखट पर पहुंचा है, जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारे में हडक़ंप मचा दिया है। ग्राम बटुरा निवासी सजग आदिवासी नागरिक मथुरा पाव ने दस्तावेजों साथ इन सफेदपोश बहरूपियों का असली चेहरा बेनकाब करते हुए सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग ठोक दी है।


स्कूल में गुप्ता, पेट्रोल पंप के लिए बन गए आदिवासी
शिकायत के मुताबिक, इस महाफर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार धनपुरी का रसूखदार व्यापारी महेश कुमार गुप्ता पिता स्व. मानिक लाल भुंजवा गुप्ता और उसका भाई दीनू है। ये खानदानी रूप से भुंजवा बनिया (पिछड़ा वर्ग) हैं, जिनके पूरे कुनबे की शादियां और सामाजिक रिश्ते हमेशा से इसी समाज में होते आए हैं। इतना ही नहीं, सरकारी स्कूलों (गणेश उ.मा.वि. धनपुरी) के छात्र रजिस्टर से लेकर जमीनों की पुरानी रजिस्ट्रियों तक में यह परिवार खुद को गुप्ता लिखता आया है, लेकिन जैसे ही आदिवासियों को मिलने वाले करोड़ों के आर्थिक लाभ और पेट्रोल पंप के आवंटन पर इनकी लार टपकी, इन शातिरों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सोहागपुर कार्यालय के साथ आंख मिचौली कर छल-कपट से वर्ष 2016 में भुंजिया आदिवासी का फर्जी स्थायी जाति प्रमाणपत्र (क्र. आरएस/460/0104/3921/2016) जारी करवा लिया।
करोड़ों की संपत्ति पर अवैध कब्जा
इस फर्जी सर्टिफिकेट की बैसाखी के दम पर महेश गुप्ता ने देखते ही देखते रूंगटा रोड बुढ़ार में इंडियन ऑयल का भव्य पेट्रोल पंप, मेढिय़ारास में एचपीसीएल का पेट्रोल पंप और जरवाही में भी एक बड़ा पेट्रोल-डीजल पंप हथिया लिया। इतना ही नहीं, आदिवासियों की कीमती जमीनों को निगलने के लिए कटकोना (बुढ़ार) में खसरा नंबर 420/2/2 और 420/2/3 की जमीन भी कौडिय़ों के भाव अपने नाम करवा ली।

ईसाई बनकर भी हड़प ली आदिवासियों की जमीन

जालसाजी का यह खेल यहीं खत्म नहीं होता। इस सिंडिकेट का दूसरा बड़ा मोहरा राजनगर (अनूपपुर) का सुमन कुमार पिता रॉबर्ट कुजूर है। ईसाई धर्म अपना चुके इस शख्स ने भी पूरी चालाकी से खुद को आदिवासी प्रदर्शित कर बटुरा क्षेत्र में आदिवासियों के लिए आरक्षित कीमती भूखंडों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। यह साफ तौर पर संवैधानिक अधिकारों का खुला चीरहरण है, जहां गैर-आदिवासी लोग फर्जी कागजातों के दम पर असली आदिवासियों को उनके मौलिक अधिकारों से बेदखल कर रहे हैं।

जेल भेजने की तैयारी, आरपार की लड़ाई!


शिकायतकर्ता मथुरा पाव ने कलेक्टर से आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए मांग की है कि इन बहरूपियों के फर्जी जाति प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं, इनके द्वारा हड़पे गए पेट्रोल पंप और जमीनें जब्त की जाएं और आदिवासियों के हक पर डाका डालने के संगीन जुर्म में इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी का एफआईआर दर्ज कर इन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।

अजय पाल

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