​शहडोल-​मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं बेरोजगार युवाओं की ज्वलंत समस्याओं को लेकर गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन इंडिया (GSU) ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को यूनियन के पदाधिकारियों ने एक दिवसीय ज्ञापन आंदोलन के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और आयुक्त (जनजाति कार्य विभाग) के नाम शहडोल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

​यूनियन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन बड़ी समस्याओं को रेखांकित किया गया है:

​1. कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती में ST आरक्षण के उल्लंघन का आरोप
​संगठन का आरोप है कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित समूह-2, उपसमूह-1 अंतर्गत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के आरक्षण रोस्टर का घोर उल्लंघन किया गया है।
​कुल 2784 पदों की इस भर्ती में से अनारक्षित वर्ग के लिए 1126, ईडब्ल्यूएस के लिए 444, अनुसूचित जाति के लिए 316 और ओबीसी वर्ग के लिए 776 पद शामिल हैं।
​वैधानिक प्रावधानों के अनुसार, ST वर्ग को 20% आरक्षण के तहत लगभग 557 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन विज्ञापन में इस वर्ग के लिए मात्र 122 पद ही घोषित किए गए हैं।
​संगठन ने इस विसंगति को पूरी तरह से गैर-संवैधानिक और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने मांग की है कि विभागवार और श्रेणीवार रोस्टर को तत्काल सार्वजनिक किया जाए और ST वर्ग के पदों में वृद्धि सुनिश्चित की जाए।
​2. पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को मिले मुआवजा और हो CBI जांच
​ज्ञापन में देश और प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक (जैसे NEET, व्यापमं, पटवारी आदि) का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया गया है।
​GSU का कहना है कि बार-बार पेपर निरस्त या लीक होने से छात्र मानसिक और आर्थिक अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं, यहाँ तक कि कई छात्र आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं।
​संगठन ने मांग की है कि पिछले 3 सालों में हुए सभी पेपर लीक मामलों की CBI या उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
​इसके साथ ही, प्रभावित प्रत्येक छात्र को परीक्षा आवेदन शुल्क और यात्रा में हुए खर्च की भरपाई शासन द्वारा की जाए।
​3. छात्रवृत्ति एवं आवास भत्ते का अटका भुगतान तत्काल जारी हो
​तीसरी प्रमुख मांग के रूप में संगठन ने बताया कि जिले के शासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत ST, SC और OBC वर्ग के अधिकांश छात्र-छात्राओं की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वे पूरी तरह से सरकारी छात्रवृत्ति और आवास भत्ते पर निर्भर हैं।
​लंबे समय से इस राशि का भुगतान नहीं होने के कारण छात्र अपना परीक्षा फॉर्म तक नहीं भर पा रहे हैं।
​संगठन ने सभी लंबित छात्रवृत्ति और आवास भत्ते की राशि छात्रों के बैंक खातों में तत्काल अंतरित (ट्रांसफर) करने की मांग की है।

​उग्र आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के दौरान गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के जिला अध्यक्ष और कई छात्र पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनके हस्ताक्षर ज्ञापन पत्र पर मौजूद हैं। ज्ञापन की प्रतिलिपियाँ मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, जनजाति कार्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, कृषि विभाग के प्रमुख सचिवों तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को भी सूचनार्थ भेजी गई हैं।
छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि इन न्यायोचित मांगों पर समय रहते समयबद्ध निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश के आदिवासी और वंचित समुदाय के युवाओं में व्याप्त आक्रोश एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अजय पाल

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