डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी। ग्राम पंचायत गणेशपुर में निर्माणाधीन पंचायत भवन (अटल भवन) की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में कथित लापरवाही का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। भवन निर्माण में खामियां मिलने के बाद जहां सहायक यंत्री और उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है, वहीं सरपंच, तत्कालीन सचिव और प्रभारी सचिव को भी सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। पंचायत भवन निर्माण से जुड़े इस मामले में अब तकनीकी निगरानी से लेकर राशि के आहरण और पंचायत स्तर की जिम्मेदारी तक कई पहलुओं पर जवाब मांगा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने निर्माणाधीन पंचायत भवन का निरीक्षण किया था। इस दौरान निर्माण कार्य में जगह-जगह हनीकॉम्बिंग यानी कंक्रीट में छेद और खाली जगह जैसी खामियां पाई गईं। इसके अलावा सीढ़ियों में राइजर और चौड़ाई भी अनुपयुक्त मिली। निरीक्षण के समय भवन का निर्माण कार्य अधूरा पाया गया। बताया गया है कि इससे पहले 21 और 28 सितंबर को भी कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय में निर्माण पूरा नहीं हो सका।
31.64 लाख रुपये का आहरण, माप पुस्तिका में 20 लाख का मूल्यांकन
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में राशि के आहरण और मूल्यांकन के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा 31 लाख 64 हजार 624 रुपये की राशि आहरित की जा चुकी है। वहीं, नोटिस में 27 लाख 89 हजार 724 रुपये के कार्य की राशि आहरित होने का उल्लेख है, जबकि माप पुस्तिका में 20 लाख 1 हजार 690 रुपये के कार्य का मूल्यांकन दर्ज बताया गया है।
इन आंकड़ों के बीच अंतर को देखते हुए निर्माण की वास्तविक प्रगति, मूल्यांकन और राशि के आहरण की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित अभिलेखों और तकनीकी जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
सहायक यंत्री और उपयंत्री से तीन दिन में जवाब तलब
निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने और समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं होने के मामले में जिला पंचायत के सीईओ ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सहायक यंत्री बी.एस. तिलगाम और उपयंत्री धर्मेन्द्र यादव को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। नोटिस में तकनीकी मार्गदर्शन और देखरेख में लापरवाही के कारण निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है।
दोनों अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब नहीं देने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरपंच, तत्कालीन सचिव और प्रभारी सचिव की सुनवाई 5 नवंबर को
दूसरी ओर, ग्राम पंचायत गणेशपुर के सरपंच अमर सिंह पट्टा, तत्कालीन सचिव कन्हैयालाल यादव और प्रभारी सचिव भगवत यादव को भी सुनवाई के लिए सूचना पत्र जारी किया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, धारा 89 के अंतर्गत पंजीकृत प्रकरण क्रमांक 437/2026 में 5 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे सुनवाई निर्धारित की गई है।
संबंधितों को निर्धारित तिथि और समय पर जवाब सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। इस सुनवाई में पंचायत स्तर पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी और प्रकरण में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
अब सवाल—निर्माण की खामियों के लिए किसकी कितनी जिम्मेदारी?
गणेशपुर पंचायत भवन का मामला अब केवल निर्माण अधूरा रहने तक सीमित नहीं है। एक ओर भवन की गुणवत्ता पर सवाल हैं, दूसरी ओर राशि के आहरण और माप पुस्तिका में दर्ज मूल्यांकन के आंकड़े भी स्पष्टीकरण की मांग करते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि निर्माण की वास्तविक स्थिति के अनुरूप मूल्यांकन किया गया या नहीं, तकनीकी निरीक्षण किस स्तर पर हुआ और पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद काम समय पर पूरा क्यों नहीं हो सका।
प्रशासन ने पंचायत पदाधिकारियों के साथ तकनीकी अधिकारियों से भी जवाब मांगा है। अब आगे की जांच और सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि निर्माण में सामने आई कमियों के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और किनकी जिम्मेदारी निर्धारित होती है।
सरकारी धन से बनने वाला पंचायत भवन ग्रामीणों की सार्वजनिक संपत्ति है। इसलिए जरूरी है कि जांच केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, मूल्यांकन, राशि के आहरण और निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर नियमानुसार जवाबदेही तय की जाए।







