डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
तीन पेटी शराब ले जाते युवक को रोककर पुलिस को सौंपा, करीब 12,620 रुपए की शराब बरामद होने की जानकारी; कार्रवाई कराने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप
डिंडौरी/समनापुर। जिले में अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर अंकुश लगाने के दावों के बीच सोमवार को समनापुर विकासखंड मुख्यालय में सामने आए एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां दो युवकों ने कथित रूप से तीन पेटी शराब लेकर जा रहे एक व्यक्ति को सरेराह रोक लिया और पुलिस को इसकी सूचना दी। आरोप है कि कार्रवाई कराने पर संबंधित व्यक्ति ने युवकों को जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बावजूद युवक पीछे नहीं हटे और शराब पुलिस के हवाले कर दी। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे आशीष सोनवानी और राजेश कुमार यादव बाजार पहुंचे थे। इसी दौरान ओमप्रकाश गुप्ता नामक व्यक्ति तीन कार्टून लेकर बिछिया गांव की ओर जाता दिखाई दिया। संदेह होने पर युवकों ने उसे रोका। युवकों के मुताबिक कार्टून की जांच करने पर उसमें देशी और अंग्रेजी शराब मिली, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
करीब 12 हजार की शराब मिलने की जानकारी
युवकों द्वारा पुलिस को सौंपी गई शराब में 50 पाव प्लेन शराब होने की जानकारी है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3,500 रुपये बताई गई है। इसके अलावा एमडी रम के 48 पाव मिलने की बात कही गई है, जिसकी कीमत लगभग 9,120 रुपये बताई जा रही है। इस तरह कुल शराब की अनुमानित कीमत करीब 12,620 रुपये है।
शिकायतों के बाद भी नहीं रुका कारोबार तो खुद सड़क पर उतरे युवक
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में अवैध शराब के परिवहन और बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो इसकी सप्लाई चेन आखिर टूट क्यों नहीं रही? युवकों का आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें स्वयं शराब पकड़कर पुलिस को सूचना देनी पड़ी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अवैध शराब गांवों तक किसके संरक्षण अथवा नेटवर्क के जरिए पहुंच रही है और इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कार्रवाई कर रहे हैं?
आवाज उठाने वालों को धमकी का आरोप, सुरक्षा पर भी सवाल
मामला केवल शराब पकड़े जाने तक सीमित नहीं है। आशीष और राजेश का आरोप है कि शराब पकड़ने और पुलिस को सूचना देने के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। ग्रामीणों ने शराब ठेकेदार से जुड़े कथित लोगों पर भी धमकाने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाने के बाद यदि शिकायतकर्ताओं को ही धमकियां मिलेंगी तो आम व्यक्ति ऐसे कारोबार के खिलाफ सामने आने का साहस कैसे करेगा?
सिर्फ शराब और कैरियर तक कार्रवाई या नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?
अब बड़ा सवाल यह भी है कि पुलिस की जांच केवल पकड़ी गई शराब और उसे ले जाने वाले व्यक्ति तक सीमित रहेगी या शराब के स्रोत और गंतव्य की भी पड़ताल होगी। शराब कहां से आई थी, किसने दी थी, बिछिया में किसे पहुंचाई जानी थी और इस तरह की सप्लाई पहले भी की गई या नहीं—इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल समनापुर की सड़क पर युवकों द्वारा शराब पकड़ने की घटना ने व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—जब आम युवकों को सड़क पर उतरकर अवैध शराब पकड़नी पड़ रही है, तो इसे रोकने के लिए जिम्मेदार अमला आखिर कहां है?
