500 कुंटल धान का हिसाब गायब, किसानों का भुगतान अटका — “रसीद हाथ में, पैसा किसके पास?”
सहकारिता व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल
किसानों का फूटा गुस्सा — “जांच नहीं हुई तो सड़कों पर होगा संग्राम
घंसौर / क्षेत्र की बहुउद्देशीय कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित केदारपुर (घंसौर) इन दिनों कथित धान घोटाले को लेकर पूरे इलाके में सुर्खियों के केंद्र में है। धान खरीदी केंद्र में लगभग 500 कुंटल धान के कथित गोलमाल ने किसानों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। किसानों का आरोप है कि उनसे बाकायदा धान की तौल कर पावती रसीदें दे दी गईं, लेकिन जनवरी 2026 से आज तक भुगतान नहीं हुआ। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब धान खरीदी गई, रसीदें जारी हुईं, तो किसानों की खून, पसीने ,मेहनत की रकम आखिर गायब कहां हो गई?
पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने शासन की समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था पर पूरा भरोसा कर अपनी उपज केंद्र में बेची थी। उम्मीद थी कि निर्धारित समय सीमा में भुगतान खातों में पहुंच जाएगा, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी बैंक खाते खाली पड़े हैं। किसान लगातार खरीदी केंद्र, सहकारिता विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, मगर हर बार उन्हें केवल आश्वासन और जांच का भरोसा देकर लौटा दिया जाता है। कई किसानों ने तो थाने तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल कागजी खानापूर्ति ही दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक खेल का हिस्सा हो सकता है। गांव में खुलेआम आरोप लगाए जा रहे हैं कि किसानों से खरीदी गई धान को कथित रूप से दूसरे व्यापारियों और केंद्रों तक पहुंचाकर भुगतान राशि का बंदरबांट कर लिया गया। यही वजह है कि “धान खरीदी हुई, रसीद मिली, लेकिन भुगतान गायब” अब पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है।
मामले में खरीदी केंद्र प्रभारी अशोक प्रजापति, कंप्यूटर ऑपरेटर विजय यादव, सह ऑपरेटर बालकिशन यादव, प्रबंधक शशि सिंह राजपूत तथा संबंधित सहकारिता अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि बिना मिलीभगत के इतना बड़ा मामला संभव नहीं हो सकता। ग्रामीणों ने आर्थिक अपराध शाखा और विशेष जांच दल से निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और किसानों का लंबित भुगतान तत्काल कराने की मांग उठाई है।
क्षेत्र में बढ़ते जनाक्रोश के बीच ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। फिलहाल केदारपुर धान खरीदी केंद्र पूरे क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर चर्चा में है।
इनका कहना है — केदारपुर धान खरीदी घोटाले की जांच करा कर दोषियों पर F .I.R. कर सक्त से सक्त कार्यवाही की जावेगी ।
दिलीप डेहरिया सीईओ सहकारिता विभाग सिवनी
इनका कहना है– 500 कुंटल किसानो की धान का भुगतान नहीं किया गया है इस महा घोटाले को लेकर मेरा कोई लेना देना नहीं है इसमें धान खरीदी प्रभारी अशोक प्रजापति ऑपरेटर विजय यादव साह ऑपरेटर बालकिशन यादव जिम्मेदार हैं ।
शशि सिंह राजपूत प्रबंधक केदारपुर (घंसौर) सिवनी
इनका कहना है– मैंने 439 बोरी धान खरीदी केंद्र केदारपुर कोड नंबर 5 9337 199 में दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेची गई थी जिसका भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया गया है हमारे द्वारा उच्च अधिकारियों को बार-बार अवगत कराया गया है मगर आज दिनांक तक भुगतान नहीं किया जा रहा है
विष्णु मोहन मिश्रा पीड़ित किसान
इनका कहना है — आपके द्वारा केदारपुर धान घोटाला मेरे संज्ञान में लाया गया है मैं इसकी जांच के लिए सहकारिता विभाग भोपाल के उच्च अधिकारियों से बात करूंगा एवं उनकी एक टीम गठित करवा कर केदारपुर धान घोटाले की जांच की जाएगी एवं विधानसभा में भी प्रश्न लगाऊंगा और कांग्रेस पार्टी को अगर इसके लिए सड़कों पर उतरना पड़ा एवं आंदोलन भी करना पड़ा तो हम इसके लिए तैयार हैं योगेंद्र सिंह बाबा कांग्रेस विधायक लखनादौन
इनका कहना है केदारपुर धान खरीदी घोटाले की जांच के लिए मैंने सीईओ दिलीप डेहरिया को नियुक्त किया है वह जैसे ही जांच प्रतिवेदन मुझे देते हैं दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी l
जी .एस डेहरिया उप रजिस्टार सहकारिता विभाग सिवनी

संदीप जयसवाल घंसौर की खबर

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